ईरान रविवार को एक सैटेलाइट को लॉन्च करने की तैयारी में है। वहीं, अमेरिका ने ईरान के इस कार्यक्रम पर चिंता जताते हुए कहा है कि सैटेलाइट लॉन्च करने की तकनीक का प्रयोग परमाणु हथियारों को बनाने में किया जा सकता है। इससे अमेरिका को भी खतरा पैदा हो सकता है।
समाचार एजेंसी रायटर्स के अनुसार, ईरान के सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी मंत्री मोहम्मद जवाद अजरी-जहरोमी ने कहा कि 'जफर' सैटेलाइट को आज 7,400 किलोमीटर की गति से सेमनान से अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। गौरतलब है कि ईरान ने पिछले साल दो सैटेलाइट परीक्षण किए थे, जो असफल रहे थे।
संयुक्त राज्य अमेरिका का कहना है कि यह चिंताजनक है कि सैटेलाइटों को कक्षा में रखने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली लंबी दूरी की बैलिस्टिक तकनीक का इस्तेमाल परमाणु युद्धक हथियारों को लॉन्च करने के लिए भी किया जा सकता है। वहीं, तेहरान इस बात से इंकार करते हुए कहा है कि वह अपने सैटेलाइट प्रोग्राम का प्रयोग मिसाइल बनाने में करेगा। उन्होंने कहा कि हमारे द्वारा कभी भी परमाणु हथियारों के विकास करने की कोशिश नहीं की गई है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए बनाए गए एक अंतरराष्ट्रीय समझौते से वाशिंगटन को साल 2018 में अलग कर लिया था। इसके बाद अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंधों को फिर से लागू किया। ट्रंप ने कहा कि परमाणु समझौते के अंदर इस बात का उल्लेख नहीं है कि वह तेहरान के मिसाइल कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगा सके।
परमाणु मुद्दे पर चल रहे विवाद के बीच ईरान और अमेरिका के बीच तनाव उस वक्त अपने चरम पर पहुंच गया, जब अमेरिका ने ड्रोन हमला कर ईरान के सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी को बगदाद में मार गिराया। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इराक स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर हमला मिसाइल हमले किए।
ईरानी मंत्री अजरी-जहरोमी ने कहा कि एक बार सैटेलाइट के कक्षा में स्थापित होने के बाद, पहली तस्वीर के रूप में सुलेमानी की तस्वीर प्रसारित की जाएगी। ईरान ने 2009 में अपना पहला सैटेलाइट ओमिड (होप) और जून 2011 में रासाद (ऑब्जर्वेशन) सैटेलाइट कक्षा में भेजा था। तेहरान ने 2012 में कहा था कि उसने अपने तीसरे घरेलू-निर्मित सैटेलाइट नाविद (प्रोमिस) को सफलतापूर्वक कक्षा में भेज दिया है।