कूटनीतिक गलियारे के सूत्र बताते हैं कि यह कदम अमेरिका द्वारा ईरान के हमले के बाद प्रतिक्रिया देने की संभावना के कारण यह सतर्कता बरती जा रही है।
पूर्व विदेश सचिव शशांक ने कहा कि ईरान के हमले ने अमेरिका का गुरूर तो तोड़ा है। शशांक का कहना है कि इससे अमेरिका की सुपीरियॉरिटी पर हमला है। इसलिए अमेरिका इस पर छोटी ही सही, लेकिन प्रतिक्रिया देगा। वहीं दोनों देशों के बीच में कोई युद्ध की संभावना नहीं है। शशांक का कहना है कि ईरान के नेताओं को युद्ध का नतीजा पता है।
उन्हें मालूम है कि ईरान से अमेरिका की दूरी हजारों किमी दूर है। इसके सामानांतर इराक, सीरिया समेत तमाम देशों का उन्हें हश्र भी पता है। इसके अलावा अमेरिका भी युद्ध जैसी स्थिति में जाने का पक्षधर नहीं दिखाई देता।
पूर्व विदेश सचिव शशांक का कहना है कि अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ईरान पर दबाव बढ़ाएंगे। वह ईरान पर दबाव के जरिए एक बेहतर डील करने की कोशिश करेगा। इसके साथ-साथ अमेरिका की कोशिश इराक से अपने सैन्य अड्डे हटाने की रहेगी। उसे इराक अब असुरक्षित लग रहा है। उसे नए सैन्य बैस के बारे में भी काफी सोचना पड़ेगा। ईरान के सैन्य कमांडर जनरल सुलेमानी के मारे जाने के बाद शिया समुदाय एकजुट हो गया है।
ईरान द्वारा मिसाइलें दागने के बाद ईरान के सर्वोच्च मान्यता प्राप्त नेता अयातुल्ला अली खमेनेई ने देश के नागरिकों को संबोधित किया। खमेनेई का यह वक्तव्य अब वायरल हो रहा है। ईरान के नेता ने कहा कि अब काम पूरा हुआ है। उन्होंने कहा कि ईरान ने अमेरिका के घमंड पर तमाचा जड़कर उसका गुरूर चूर-चूर कर दिया है।
ईरान की तरफ से किए गए इस हमले को खमेनेई ने सफल बताया और अमेरिकी हमले में मारे गए जनरल कासिम सुलेमानी को लेकर कहा कि उन्हें भूल पाना मुश्किल है।
इस बीच न केवल ईरान के विदेश मंत्री, बल्कि दुनिया भर में फैले उसके दूतावास, मिशनों ने अपना पक्ष रहा। नई दिल्ली में भी ईरान के राजदूत अली चेगनी ने अपना पक्ष रखा और कहा कि उनका देश युद्ध नहीं चाहता। ईरान का काम पूरा हो गया है और उनका देश अमेरिका के साथ तनाव की स्थिति में भारत द्वारा किए गए शांति के प्रयास का स्वागत करेगा।