ईरान में नकाब विरोधी महिलाओं के आंदोलन के लगातार फैलते जाने से ईरान की इस्लामिक सरकार के लिए एक दशक में सबसे बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। पर्यवेक्षकों में ये आम राय है कि 2009 के राष्ट्रपति चुनाव में हुई कथित धांधली के बाद ईरान में भड़के जन-विद्रोह के बाद से यहां सड़कों पर ऐसा विरोध देखने को नहीं मिला था।
प्रदर्शनों के बेकाबू बने रहने के कारण ईरान सरकार ने देश में सोशल मीडिया और इंटरनेट पर रोक लगाने का फैसला किया है। इसके पहले आई खबरों के मुताबिक ईरान के सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कम से कम पांच लोग मारे जा चुके हैं। ये मौतें महसा अमिनी के अलावा हैं, जिनकी मृत्यु पुलिस हिरासत में हुई थी।
नॉर्वे के मानवाधिकार संगठन हेनगाव ने बताया है कि ईरान के कुर्दिश इलाके में प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ सुरक्षा बल बेरहमी से पेश आए। उन्होंने कुछ लोगों को सीधे गोली मार दी। उनमें पांच लोग मारे गए, जबकि 75 से ज्यादा घायल हो गए। संयुक्त राष्ट्र की कार्यवाहक मानवाधिकार आयुक्त नदा अल-नशीफ ने मंगलवार को ही एक बयान जारी कर ईरान के सुरक्षा बलों की ‘हिंसक जवाबी कार्रवाइयों’ की निंदा की थी।
ईरान सरकार ने दावा किया है कि प्रदर्शनकारी लगातार पुलिस पर हमले कर रहे हैं और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस कारण सुरक्षा बलों को कार्रवाई करनी पड़ रही है। तेहरान के गर्वनर मोहसिन मंसूरी एक ट्विट में दावा कर चुके हैं कि प्रदर्शनकारी पूरी तरह संगठित हैं और अफरा-तफरी फैलाने का प्रशिक्षण उन्हें मिला हुआ है।
सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मौतों की खबर पश्चिमी मीडिया के हवाले से आई है। अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन ने इसका जिक्र अपनी एक विस्तृत रिपोर्ट में किया। लेकिन साथ ही उसने कहा कि स्वतंत्र रूप से वह लोगों के हताहत होने की बात की पुष्टि नहीं कर पाया है।
ईरान में प्रदर्शनों की शुरुआत पिछले हफ्ते हुई थी, जब 22 वर्षीया महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत हो गई। अमीनी को ठीक से नकाब ना पहनने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि अमीनी की मौत दिल का दौरा पड़ने के कारण हुई। लेकिन अमीनी के परिवार ने दावा किया है कि इसके पहले अमीनी को दिल की बीमारी जैसी कोई शिकायत नहीं थी।
अमीनी को हिरासत में लेकर ईरान में ‘नैतिकता सुनिश्चित करने की प्रभारी’ पुलिस शिक्षण सेंटर में ले गई थी। पुलिस की तरफ से जारी वीडियो में दिखाया गया कि पहनावे संबंधी प्रशिक्षण के दौरान वे अचानक बेहोश होकर गिर पड़ीं। लेकिन आलोचकों ने इसे एडिट किया हुआ वीडियो बताया है। अमीनी की अंत्येष्टि बीते शनिवार को की गई। उसके बाद जब ये खबर फैली, तब से ईरान के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। खास कर कुर्दिस्तान प्रांत में अशांति फैली है। अमीनी की मौत इसी प्रांत में हुई थी।
बताया जाता है कि कुछ जगहों पर महिलाओं ने प्रदर्शनों के दौरान हिजाब उतार दिए और विरोध जताने के लिए उन्हें हाथ में लेकर लहराया। इंटरनेट निगरानी करने वाली संस्था नेटब्लॉक ने कहा है कि सोमवार से ही देश के कई हिस्सों में इंटरनेट लगभग पूरी तरह बाधित है।