पाकिस्तान ने ईरान को प्रतिबंधों से छूट दिलाने के लिए अमेरिका से संपर्क किया है। वह अमेरिका को यह समझाने की कोशिश में है कि प्रतिबंधों में छूट मिलने की स्थिति में ईरान-पाकिस्तान-भारत गैस पाइपलाइन का निर्माण पूरा हो सकेगा, जिससे पाकिस्तान को ऊर्जा का सस्ता सस्ता स्रोत मिलेगा। इससे उसकी आर्थिक मुसीबत का एक स्थायी हल मिल सकेगा।
हाल में पाकिस्तान के प्रति अमेरिका और पश्चिमी देशों का रुख का रुख नरम हुआ है। इसकी ताजा मिसाल इसी हफ्ते सामने आई, जब इन देशों ने आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के प्रति अपना निर्णय सार्वजनिक किया। इन देशों अफगान मामलों के दूतों की एक विशेष बैठक पिछली 20 फरवरी को पेरिस में हुई थी, जिसमें टीटीपी को उन्होंने न सिर्फ पाकिस्तान, बल्कि अपनी सुरक्षा के लिए भी खतरा घोषित किया। बैठक में अमेरिका के अलावा ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूरोपीय संघ, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नॉर्वे, स्विट्जरलैंड और ब्रिटेन के दूतों ने भाग लिया। इस बैठक में हुए निर्णय के बारे में बयान इसी मंगलवार को जारी किया गया। पाकिस्तान में इस खबर पर गहरी राहत महसूस की गई है।
ईरान-पाकिस्तान-भारत के बीच बनने वाली गैस पाइपलाइन के लिए पाकिस्तान ने अपने हिस्से का काम पूरा नहीं किया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर पाकिस्तान ने मार्च 2024 तक यह काम पूरा नहीं किया, तो वह इस मसले को अंतरराष्ट्रीय पंचाट में ले जाएगा। इस पाइपलाइन के निर्माण पर बातचीत 29 वर्ष पहले शुरू हुई थी। बाद में इसको लेकर करार हुआ। इसके मुताबिक एक जनवरी 2015 को ईरान से पाकिस्तान के लिए गैस की आपूर्ति शुरू हो जानी थी। लेकिन पाकिस्तान ने अपने हिस्से का काम नहीं किया। ईरान अपने हिस्से की पाइपलाइन का निर्माण 2011 में ही पूरा कर चुका है।
पाकिस्तान का कहना है कि ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण वह अपने हिस्से का काम आगे नहीं बढ़ा पाया। इन प्रतिबंधों के कारण ईरान से गैस खरीद पर रोक लगी हुई है। इसलिए पाकिस्तान के बैंक पाइपलाइन के निर्माण कार्य के लिए कर्ज देने को लेकर अनिच्छुक रहे हैं। इस बीच पाकिस्तान की ईरानी प्राकृतिक गैस से काफी अधिक महंगी दर पर लिक्विफाइड नैचुरल गैस खरीदने की मजबूरी बनी हुई है। यह इस समय पाकिस्तान में पैदा हुए ऊर्जा संकट का यह भी एक प्रमुख पहलू है।
पाइपलाइन के लिए हुए समझौते में प्रावधान है कि ईरान या पाकिस्तान दोनों से कोई किसी अन्य देश को करार उल्लंघन के आरोप में मार्च 2024 तक कोर्ट में नहीं ले जा सकेगा। अब ईरान ने इस समयसीमा की याद पाकिस्तान को दिलाई है। अगर पंचाट की कार्यवाही में करार का उल्लंघन करने आरोप साबित हुआ, तो पाकिस्तान को 18 बिलियन डॉलर का जुर्माना देना होगा। इसीलिए अब पाकिस्तान रास्ता निकालने के लिए हाथ-पांव मार रहा है।
ईरान में पाकिस्तान के राजदूत रह चुके आसिफ दुर्रानी ने वेबसाइट द क्रैडस.को को बताया- ‘पाकिस्तान को लगभग 781 किलोमीटर की पाइपलाइन अपने देश के अंदर बनानी है, जिस पर तीन बिलियन डॉलर का खर्च आएगा। सवाल है कि यह पैसा कहां से आएगा। इसीलिए यह जरूरी हो गया है कि पाकिस्तान की बिगड़ती हालत को देखते हुए अमेरिकी अधिकारी इस पर पुनर्विचार करें।’