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Iran Execution: ईरान ने कराटे चैंपियन और कोच को फांसी पर लटकाया, 40 लोगों को सजा-ए-मौत का एलान

Sun, 08 Jan 2023 02:07 AM IST
गुलाम अहमद वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, दुबई

सार

Iran Executions: ईरान में हिजाब विरोधी प्रदर्शनों के दौरान तीन नवंबर 2022 को तेहरान के बाहरी शहर कारज में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के एक सदस्य की हत्या कर दी गई थी। इस हत्या के लिए मोहम्मद करमी (22) और सैय्यद मोहम्मद हुसैनी (20) को दोषी ठहराया गया था।
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सांकेतिक तस्वीर (फाइल फोटो) - फोटो : Agency
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विस्तार
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ईरान में हिजाब के विरोध में करीब चार माह से चल रहे आंदोलन को बलपूर्वक कुचलने का सिलसिला अब भी जारी है। ऐसे ही प्रदर्शनों में शामिल होने के आरोप में शनिवार को पूर्व राष्ट्रीय कराटे चैंपियन मोहम्मद मेहदी करामी और बच्चों के कराटे कोच सैयद मोहम्मद हुसैनी को फांसी पर लटका दिया गया। ईरान के न्याय विभाग की समाचार एजेंसी मिजान के मुताबिक, करामी और हुसैनी को तीन नवंबर को पैरा मिलिट्री अधिकारी रोहल्ला अजामियान की हत्या का दोषी पाया गया है।

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हिजाब विरोधी प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में अब तक कुल चार लोगों पर फांसी दी जा चुकी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शन से जुड़े 41 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को फांसी की सजा सुनाई गई है। वहीं, एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फांसी पर लटकाए गए चारों प्रदर्शनकारियों सहित कुल 26 प्रदर्शनकारियों के नाम अब तक सामने आ चुके हैं, जिन्हें फांसी की सजा दी गई है। इनमें से तीन और को जल्द ही फांसी पर लटकाया जा सकता है।

कार्रवाई में 516 प्रदर्शनकारियों की मौत
हिजाब नहीं पहनने के जुर्म में 16 सितंबर को महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद पूरे देश में हिजाब के खिलाफ आंदोलन शुरू हुए थे। अब तक 19,262 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई में 516 प्रदर्शनकारियों की जान गई है।
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दुनियाभर में उठी आवाज
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त सहित तमाम मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि ईरान में निष्पक्ष सुनवाई और बचाव का पर्याप्त मौका दिए बिना ही प्रदर्शनकारियों को मनमाने तरीके से फांसी की सजा दी जा रही है। दोनों प्रदर्शनकारियों को फांसी की सजा देने के खिलाफ यूरोपीय संघ की विदेश मामलात व सुरक्षा समिति के प्रमुख जोसप बोरेल ने ईरान में फांसी की सजा की अलोचना की। ईरान के लिए अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि रॉबर्ट माले ने इन्हें न्यायिक हत्या करार दिया। ब्रिटिश विदेश मंत्री जेम्स क्लेवरली ने कहा, इस क्रूरता को तुरंत रोका जाना चाहिए। फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने कहा, ईरानी सरकार बहुत ही घिनौने तरीके से अपने उन लोगों की हत्याएं कर रही है, जो वाजिब हक मांग रहे हैं।

परिवार से आखिरी बार बात करने का मौका तक नहीं दिया
करामी के वकील मोहम्मद हुसैन अगासी ने कहा, बचाव पक्ष की दलीलें सुनना तो दूर करामी को आखिरी बार परिवार से बात करने तक का मौका तक नहीं दिया गया। दोनों ने ईरान के सर्वोच्च न्यायालय में फांसी की सजा के खिलाफ अपील दायर की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। अब तक ऐसे कुल पांच मामलों में अपील दायर की गईं, जिनमें से चार की अपील खारिज की जा चुकी है। 

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