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'ऐसा मंजर पहले कभी नहीं देखा': US पर भारी पड़ा ईरान? आठ देशों में 16 अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना

Fri, 01 May 2026 11:13 PM IST
राकेश कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला।

सार

एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान ने अमेरिका के सबसे महंगे सैन्य संसाधनों को निशाना बनाकर उसकी रणनीतिक कमर तोड़ दी है। यह हमला न केवल वित्तीय चोट है, बल्कि अरब सहयोगियों के बीच अमेरिका की सुरक्षा गारंटी पर भी एक बड़ा सवालिया निशान है। रिपोर्ट में और भी कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। खबर में जानिए...
 
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जंग में ईरान ने अमेरिकी ठिकानों को बनाया निशाना - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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पश्चिम एशिया के रणक्षेत्र में समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं। 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष ने अमेरिकी सैन्य शक्ति के उस गुरूर को कड़ी चुनौती दी है, जिसे अब तक अजेय माना जाता था। सीएनएन की ताजा रिपोर्टों के अनुसार, ईरान और उसके सहयोगियों ने क्षेत्र के आठ देशों में स्थित कम से कम 16 अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। सैटेलाइट तस्वीरों और अधिकारियों के बयानों से पता चला है कि कई सैन्य सुविधाएं अब आंशिक रूप से अनुपयोगी हो चुकी हैं।
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महंगे रडार और विमानों को बनाया निशाना
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने बेहद सटीक रणनीति के साथ हमला किया। उसने उन संपत्तियों को निशाना बनाया जो बेहद महंगी हैं और जिन्हें बदलना आसान नहीं है। हमलों में उन्नत रडार सिस्टम, संचार ढांचे और लड़ाकू विमानों को सबसे ज्यादा क्षति पहुंची है। रिपोर्ट में एक अमेरिकी कांग्रेस सहयोगी के हवाले से कहा गया, 'ईरान ने उन ठिकानों की पहचान की जो सबसे अधिक लागत प्रभावी थे। रडार सिस्टम क्षेत्र में हमारे सबसे महंगे और सीमित संसाधन हैं।'

यह भी पढ़ें: US-Iran Conflict: 'ईरान ने प्रगति की, लेकिन मैं संतुष्ट नहीं', तेहरान के नए प्रस्ताव पर बोले राष्ट्रपति ट्रंप
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अरब देशों की बढ़ती चिंता
इस युद्ध ने केवल बुनियादी ढांचे को ही नहीं, बल्कि राजनयिक विश्वास को भी चोट पहुंचाई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन ठिकानों की मेजबानी करने वाले खाड़ी देश अब अमेरिका की रक्षा क्षमता पर सवाल उठा रहे हैं। सीएनएन ने सऊदी के एक अधिकारी के हवाले से कहा, 'इस युद्ध ने हमें दिखा दिया कि अमेरिका के साथ गठबंधन विशिष्ट नहीं हो सकता और यह अभेद्य भी नहीं है। अमेरिकी अधिकारियों के लिए भी यह स्थिति अप्रत्याशित है।' सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, एक वरिष्ठ अमेरिकी सूत्र ने तबाही के पैमाने पर टिप्पणी करते हुए कहा, 'मैंने ऐसा मंजर पहले कभी नहीं देखा।'
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अरबों डॉलर का आर्थिक बोझ
पेंटागन के कॉम्पट्रॉलर जूल्स जे हर्स्ट III ने सांसदों को बताया कि इस संघर्ष में अब तक 25 बिलियन डॉलर खर्च हो चुके हैं। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों और अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि वास्तविक घाटा 40 से 50 बिलियन डॉलर यानी 5 हजार करोड़ के बीच है। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने दोबारा हमले किए, तो उसे और भी दर्दनाक प्रहार झेलने होंगे। फिलहाल, पूरे पश्चिम एशिया में अमेरिकी रक्षा प्रणालियां हाई अलर्ट पर हैं।

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