ईरान में हिजाब विवाद के चलते हिंसक प्रदर्शनों के सिलसिले में एक कैदी मोहसिन शेखरी को फांसी दे दी गई है। तेहरान ने कहा, उसने प्रदर्शनों के दौरान ऐसे मामलों में पहली मौत की सजा दी है। ईरान की मिजान समाचार एजेंसी ने गिरफ्तार आरोपी को फांसी की जानकारी देते हुए कहा कि आरोपी के खिलाफ तेहरान में एक सड़क को रोकने और सुरक्षा बल के एक जवान पर हमला करने का आरोप सिद्ध हुआ था।
ईरान 16 सितंबर को हिजाब नियमों के उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार की गई 22 वर्षीय युवती महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत होने के बाद से ही विरोध-प्रदर्शनों का सामना कर रहा है। प्रदर्शनों में देश की नैतिकता पुलिस के खिलाफ जबरदस्त जनाक्रोश देखा जा रहा है जो 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से ईरान के लोकतंत्र के लिए सबसे गंभीर चुनौती साबित हो रहा है। उधर कार्यकर्ताओं का कहना है कि अब तक कम से कम दर्जन भर लोगों को प्रदर्शन में शामिल होने पर मौत की सजा मिली है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक इस साल ईरान में 500 से ज्यादा लोगों को विभिन्न अपराधों में मृत्युदंड दिया जा चुका है। ओस्लो स्थित एक्टिविस्ट ग्रुप ईरान ह्यूमन राइट्स के निदेशक महमूद अमीरी-मोगद्दाम ने कहा है कि ईरान द्वारा तेजी से दी जा रहे मृत्युदंड पर वैश्विक एजेंसियों को आगे आना चाहिए, क्योंकि यहां किसी भी ट्रायल पर आरोपी को अपना वकील चुनने या आरोपों के खिलाफ सुबूत तक दिखाने की अनुमति नहीं दी जाती है। बता दें, देश में 16 सितंबर से चले इन प्रदर्शनों में अब तक 18,000 से ज्यादा हिरासत में लिए गए हैं।
भगवान के खिलाफ युद्ध छेड़ने का दोषी ठहराया
मोहसिन शेखरी को तेहरान की क्रांतिकारी अदालत में दोषी ठहराया गया। कोर्ट के बंद कमरे में हुई सुनवाई के दौरान उस पर विरोध-प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बल पर हमला करने और एक सैनिक की हत्या करने का आरोप था। शेखरी पर सड़क बाधित करने का भी आरोप था। उसे 25 सितंबर को गिरफ्तार किया और 20 नवंबर को उसे ''मुहारेबेह'' का दोषी ठहराया। फारसी में इस शब्द का अर्थ है भगवान के खिलाफ युद्ध छेड़ना।