एक ओर ईरान हताहतों का दावा कर रहा है। वहीं दूसरी ओर एक रिपोर्ट के अनुसार पेंटागन से 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के सैनिकों को पश्चिम एशिया में तैनात किए जाने की उम्मीद है। अमेरिका की ओर से ईरान के खार्ग द्वीप पर संभावित जमीनी कार्रवाई पर भी विचार किया जा रहा है। इसके चलते ईरान ने खार्ग द्वीप पर बारूदी सुरंगें बिछानी शुरू कर दी हैं।
पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव के बीच ईरान ने दावा किया है कि दुबई में दो अमेरिकी सेना के ठिकानों पर हुए हमलों में अमेरिकी सेना के कई लोग बड़ी संख्या में हताहत हुए हैं। ईरान की सरकारी मीडिया तस्नीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, यह दावा हजरत खतम अल-अंबिया के केंद्रीय मुख्यालय के एक प्रवक्ता ने किया है।
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प्रवक्ता के अनुसार इन ठिकानों में 500 से अधिक अमेरिकी सैनिक मौजूद थे, जिनमें से लगभग 400 पहले ठिकाने पर और 100 दूसरे ठिकाने पर थे। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने इन स्थानों की पहचान की। इसके बाद सटीक मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिससे भारी नुकसान का दावा किया।
घंटों तक शव ढोती रही एंबुलेंस : आईआरजीसी का दावा
प्रवक्ता ने यह भी दावा किया कि दुबई में एंबुलेंस घंटों तक मृत और घायल अमेरिकियों को ले जाने में व्यस्त रहीं। ईरानी प्रवक्ता ने आगे कहा, "डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी सेना के कमांडरों को यह पूरी तरह समझ जाना चाहिए कि यह क्षेत्र अमेरिकी सैनिकों के लिए कब्रिस्तान में बदल जाएगा। उनके पास साहसी लोगों और इस्लाम के बहादुर योद्धाओं की ईश्वरीय इच्छा के सामने आत्मसमर्पण करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा।"
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ईरानी राष्ट्रपति की चेतावनी
इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने खाड़ी देशों को अमेरिका-इस्राइल का समर्थन करने के खिलाफ चेतावनी दी है। पेजेशकियन ने देशों को सलाह दी कि अगर वे अपने राष्ट्र में विकास और सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहते हैं, तो अमेरिका-इस्राइल को ईरान पर हमला करने के लिए अपनी जमीन का इस्तेमाल न करने दें।
उन्होंने दोहराया कि अगर तेहरान के बुनियादी ढांचे या आर्थिक केंद्रों को निशाना बनाया जाता है तो ईरान अमेरिका-इस्राइल को कड़ा जवाब देगा। राष्ट्रपति पेजेशकियन ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "हमने कई बार कहा है कि ईरान पहले हमला नहीं करता है, लेकिन अगर हमारे बुनियादी ढांचे या आर्थिक केंद्रों को निशाना बनाया जाता है तो हम कड़ा जवाब देंगे।"