ईरान के शीर्ष कमांडर मेजर जनरल कासिम सुलेमानी का अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे जाने से ईरानियों में भले गुस्सा उबल रहा हो लेकिन जमीनी हालात ईरान के पक्ष में नहीं दिख रहा। इरान के दक्षिणी भाग में स्थित टर्की समेत 11 देशों में अमेरिकी सेना की ठोस मौजूदगी है।
इसके साथ इन ठिकानों पर अमेरिका की वायुसेना, ड्रोन और असलहे का बड़ा जखीरा जमा है। दक्षिणी भाग में ईरान अमेरिकी फोर्स से पूरी तरह घिरा है तो उत्तरी भाग में अफगानिस्तान में 14000 अमेरिकी सैनिक, एक वायुसेना बेस बड़े जखीरे के साथ मुकाबले को तैयार है।
सुरक्षा एजेंसियों के पास मौजूद आंकड़ों केमुताबिक टर्की में 2500 सैनिक और एक वायु सेना अड्डा, इराक में 6000 सैनिक, तीन वायु सेना अड्डा, जार्डन में 3000 सैनिक, दो वायु सेना अड्डा, कुवैत में 1300 सैनिक, पांच वायुसेना अड्डा, बहरीन में 7000 सैनिक, तीन वायु सेना अड्डा, कतर में 13000 सैनिक, दो वायु सेना अड्डा, यूएई में 5000 सैनिक, एक वायु सेना अड्डा, सऊदी अरब में 3000 सैनिक,एक वायु सेना अड्डा और ओमान में 606 सैनिक, दो वायु सेना अड्डा कायम है।
हालात पर नजर रख रहे वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक एक दिन पहले ईरान ने करीब दो दर्जन मिसाइल इराक स्थित अमेरिकी ठिकाने पर दागे। इसके परिणाम को ईरान और अमेरिकी की तरफ से तनाव कम करने के हालात माने जा रहे हैं। ईरान ने मिसाइल तो दागे लेकिन ऐसे कि अमिरका के पास जवाबी कार्रवाई की ठोस वजह ना हो।
हालांकि ईरान की मीडिया 80 अमेरिकियों के मारे जाने का दावा कर रही है। लेकिन अमेरिका के मुताबिक जानमाल का कोई नुकसान नहीं हुआ है। सूत्रों के मुताबिक ईरान का अमेरिका के साथ दो-दो हाथ करना उतना आसान नहीं होगा।