यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा कर लिया है। यह शहर बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के बेहद करीब है, जहां से दुनिया के तेल और दूसरे सामान का बड़ा हिस्सा गुजरता है। होर्मुज जलडमरूमध्य में पहले से पैदा हुए व्यवधान के बीच मोखा पर हूतियों का कब्जा वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए नया खतरा बन सकता है। क्या लाल सागर में अब संकट और गहरा जाएगा? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा कर लिया है। यह शहर बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के बेहद करीब है, जहां से दुनिया के तेल और दूसरे सामान का बड़ा हिस्सा गुजरता है। होर्मुज जलडमरूमध्य में पहले से पैदा हुए व्यवधान के बीच मोखा पर हूतियों का कब्जा वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए नया खतरा बन सकता है। क्या लाल सागर में अब संकट और गहरा जाएगा?
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यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने गुरुवार को रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा कर लिया। मोखा लाल सागर के रास्ते होने वाली समुद्री आवाजाही के लिहाज से बेहद अहम जगह है। शहर बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से करीब 80 किलोमीटर दूर है। यह वही समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया के करीब 12 प्रतिशत तेल और दूसरे सामान की ढुलाई होती है। ऐसे समय में जब होर्मुज जलडमरूमध्य में पहले ही व्यवधान पैदा हो चुका है, मोखा पर हूतियों का कब्जा समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंता पैदा कर सकता है।
मोखा पर कब्जे से क्या बदला और हूतियों को कितना बड़ा फायदा हुआ?
मोखा पर कब्जा हूतियों के लिए साल 2022 में हुए संघर्ष विराम के बाद सबसे बड़ी क्षेत्रीय बढ़त माना जा रहा है। मोखा लंबे समय से यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के साथ खड़ी सेनाओं के नियंत्रण में था। अब हूती लड़ाकों की मौजूदगी पूरे शहर में दिखाई दे रही है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, हूती बलों ने शहर के अलग-अलग हिस्सों में अपनी मौजूदगी बढ़ा दी है और बाजार बंद हो गए हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब यमन में एक दशक से ज्यादा चले गृहयुद्ध के बाद 2022 में संघर्ष विराम हुआ था।
बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
बाब अल-मंदेब लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच एक महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। मोखा इसी के बेहद करीब स्थित है। यहां से बड़ी मात्रा में तेल और अन्य व्यापारिक सामान गुजरता है। इसलिए इस इलाके पर किसी ऐसे समूह का नियंत्रण, जो पहले से क्षेत्रीय तनाव का हिस्सा रहा है, समुद्री आवाजाही के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। मोखा पर कब्जे से हूतियों को लाल सागर के करीब एक महत्वपूर्ण रणनीतिक क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने का मौका मिला है। इससे समुद्री रास्तों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।
क्या मोखा पर कब्जे से यमन में फिर बड़े युद्ध का खतरा बढ़ गया है?
मोखा पर कब्जा यमन के मौजूदा शक्ति संतुलन को प्रभावित करने वाला बड़ा घटनाक्रम है। हूती समूह और यमन सरकार से जुड़े अधिकारियों ने शहर पर उसके नियंत्रण की पुष्टि की है। यमन सरकार के साथ गठबंधन करने वाले नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज के कमांडर अहमद बाश ने भी इसकी पुष्टि की, जबकि हूतियों के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य हजाम अल-असद ने भी कब्जे की बात मानी।
एक दशक से अधिक चले गृहयुद्ध के बाद 2022 में हुआ संघर्ष विराम यमन के लिए अहम मोड़ था। अब मोखा पर कब्जा उस शांति व्यवस्था के लिए नई चुनौती बनकर सामने आया है। पूर्ण पैमाने पर गृहयुद्ध की वापसी यमनी लोगों के लिए विनाशकारी हो सकती है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर डाल सकती है।
होर्मुज में व्यवधान के बाद मोखा क्यों और अहम हो गया है?
इनपुट के मुताबिक, फरवरी में अमेरिका और इस्राइल के हमले के बाद ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान पैदा हुआ था। इसके बाद लाल सागर और बाब अल-मंदेब का महत्व वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए और बढ़ गया। ऐसे माहौल में मोखा पर हूतियों का कब्जा केवल यमन की जमीन पर नियंत्रण का मामला नहीं रह जाता, बल्कि इसका असर उस समुद्री क्षेत्र पर भी पड़ सकता है जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है। अगर यमन में फिर से बड़े पैमाने पर गृहयुद्ध शुरू होता है, तो इसका असर आम यमनी लोगों के साथ-साथ दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।