पश्चिम एशिया में समुद्री सुरक्षा को लेकर तनाव लगातार बढ़ता ही जा रहा है। इसी बीच यूएन में ईरान के राजदूत ने शिकायत कर कहा कि अमेरिका ईरानी जहाजों को रोककर समुद्री डकैती कर रहा है। दूसरी ओर खाड़ी देशों ने समुद्र में ईरान की गतिविधियों पर गंभीर चिंता जताई है।
पश्चिम एशिया में समुद्री रास्तों और सुरक्षा को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसका बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के इन मुद्दों पर आमने-सामने आना है, जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। ऐसे में ईरान ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि अमेरिका उसके जहाजों को रोककर समुद्री डकैती जैसा काम कर रहा है। ईरान के यूएन राजदूत अमीर सईद इरावानी ने कहा कि अमेरिका के पास इन कार्रवाइयों का कोई कानूनी आधार नहीं है और यह अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है।
रूसी राष्ट्रपति से भी हुई बातचीत
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस प्रस्ताव पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी बातचीत की है। वहीं अमेरिका में इस प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है, लेकिन वहां से यह साफ कहा गया है कि ईरान को इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं दिया जा सकता।
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होर्मुज में ईरान की गतिविधियों पर जीसीसी ने जताई चिंता
दूसरी ओर खाड़ी देशों के संगठन खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) ने भी होर्मुज में ईरान की गतिविधियों पर चिंता जताई है। जीसीसी ने कहा है कि समुद्री रास्तों को बंद करना या वहां से गुजरने वाले जहाजों पर रोक लगाना स्वीकार नहीं किया जा सकता। संगठन ने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा और स्वतंत्र आवाजाही बहाल रहनी चाहिए।
जीसीसी नेताओं ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता जताते हुए कहा है कि कूटनीतिक रास्ते से ही इस संकट का हल निकालना जरूरी है। साथ ही उन्होंने रक्षा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने, और क्षेत्र में रणनीतिक ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया है। कुल मिलाकर, एक तरफ ईरान और अमेरिका के बीच समुद्री रास्तों को लेकर टकराव बढ़ रहा है, तो दूसरी तरफ खाड़ी देश और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ स्थिति को संभालने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं।