ईरान में करीब तीन महीने से जारी डिजिटल ब्लैकआउट के बाद अब आम लोगों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है। ईरानी अधिकारियों ने 87 दिनों बाद इंटरनेट और संचार सेवाओं को फिर से बहाल करने की मंजूरी दे दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश लंबे समय से विरोध प्रदर्शनों, क्षेत्रीय तनाव और साइबर प्रतिबंधों के कारण वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क से लगभग कट चुका था।
28 फरवरी से बंद थीं सेवाएं
रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इस्राइल के साथ बढ़े तनाव के बाद ईरान में इंटरनेट सेवाओं पर सख्त पाबंदियां लगा दी गई थीं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि आम नागरिकों के लिए कई डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन सेवाएं पूरी तरह ठप हो गई थीं। इससे कारोबार, शिक्षा और संचार पर बड़ा असर पड़ा।
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में ईरान में मोबाइल फोन आयात में भारी गिरावट दर्ज की गई। पिछले साल की तुलना में फोन आयात और उसकी कुल कीमत दोनों में बड़ी कमी आई है। विश्लेषकों का कहना है कि इंटरनेट प्रतिबंध और आर्थिक अस्थिरता के कारण इलेक्ट्रॉनिक बाजार पर सीधा असर पड़ा है।
सुप्रीम काउंसिल ऑफ साइबरस्पेस की बैठक में फैसला
सूत्रों के मुताबिक, इंटरनेट सेवा बहाल करने का फैसला उपराष्ट्रपति मोहम्मदरेजा आरिफ की अध्यक्षता में हुई सुप्रीम काउंसिल ऑफ साइबरस्पेस की बैठक में लिया गया। ईरानी मीडिया का दावा है कि सरकार इंटरनेट एक्सेस को जनवरी 2026 से पहले वाली स्थिति में वापस लाने की तैयारी कर रही है।
युवा उद्यमियों और डिजिटल कारोबार पर पड़ा असर
लंबे समय तक इंटरनेट बंद रहने का सबसे बड़ा असर डिजिटल कारोबार और युवाओं पर पड़ा। रिपोर्टों में कहा गया है कि कई युवा उद्यमी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए कम लागत वाले बिजनेस शुरू करना चाहते थे, लेकिन इंटरनेट प्रतिबंधों के कारण उनके अवसर सीमित हो गए।