ईरानी रिवॉल्युशनरी गार्ड के कुद्स फोर्स के मुखिया को अमेरिका ने तीन जनवरी को ड्रोन हमले में मारा था जब वह अपने काफिले के साथ बगदाद में थे। ईरान ने इसका जवाब इराक के अल-असद और इबरिल स्थित दो अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर 22 मिसाइलें दाग कर दिया। उसके बाद दोनों देशों के बीच युद्ध छिड़ने की आशंका गहरी हो गई थी।
जनरल सुलेमानी की मौत के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामनेई ने इसका बदला लेने की बात कही थी। खामनेई ने कहा था कि सुलेमानी की मौत ने अमेरिका और इस्रायल के खिलाफ ईरान के विरोध को दोगुना कर दिया है।
वहीं, अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियों ने कहा है कि ईराम अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के निरीक्षकों के नहीं आने दे रहा है। साथ ही वह संभावित अघोषिक परमाणु सामग्रियों और गतिविधियों की जांच में भी आईएईए के साथ सहयोग नहीं कर रहा है। पोम्पियो ने कहा कि ऐसे में गंभीर सवाल उठता है कि तेहरान क्या छिपाने की कोशिश कर रहा है।