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Sri Lanka: कर्ज राहत पर चीन के टालमटोल से श्रीलंका में बढ़ रही नाराजगी

Sat, 17 Dec 2022 03:47 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो

सार

Sri Lanka: पेरिस क्लब से अच्छी खबर आने के बाद श्रीलंका के अधिकारियों ने उम्मीद जताई थी कि आईएमएफ से उन्हें इसी वर्ष कर्ज मिल जाएगा। लेकिन अब उन्होंने कहा है कि इसके लिए श्रीलंका को 2023 तक इंतजार करना पड़ सकता है। इसकी वजह चीन का रुख है...
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Sri Lanka Economic Crisis - फोटो : Istock
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श्रीलंका (Sri Lanka) में कर्ज राहत के मुद्दे पर चीन के रुख को लेकर नाराजगी बढ़ रही है। हाल में 22 धनी देशों के संगठन पेरिस क्लब में कर्ज चुकाने की समयसीमा बढ़ाने पर सहमति बनने के बाद अब आर्थिक संकट से ग्रस्त श्रीलंका में सारी निगाहें चीन की तरफ टिक गई हैं। जानकारों के मुताबिक चीन के कर्ज राहत देने पर राजी होने के बाद पेरिस क्लब से इस बारे में औपचारिक समझौता होगा। पेरिस क्लब फ्रांस के वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी की अध्यक्षता में काम करता है। यह क्लब धनी देशों की कर्जदाता एजेंसियों के बीच तालमेल बनाने का काम करता है।

आर्थिक संकट से निकलने में श्रीलंका की सहायता करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) उसे 2.9 बिलियन डॉलर का कर्ज देने पर राजी हुआ है। लेकिन साथ ही उसने शर्त लगा रखी है कि ये रकम वह तब जारी करेगा, जब पेरिस क्लब, चीन और दूसरे कर्जदाता देश श्रीलंका को दिए अपने कर्ज की वापसी के बारे में रियायत देने को तैयार हो जाएंगे। 

पेरिस क्लब से अच्छी खबर आने के बाद श्रीलंका के अधिकारियों ने उम्मीद जताई थी कि आईएमएफ से उन्हें इसी वर्ष कर्ज मिल जाएगा। लेकिन अब उन्होंने कहा है कि इसके लिए श्रीलंका को 2023 तक इंतजार करना पड़ सकता है। इसकी वजह चीन का रुख है, जो अभी तक किसी तरह की रियायत देने को तैयार नहीं हुआ है। श्रीलंका सरकार पर मौजूद द्विपक्षीय सरकारी कर्जों में 52 फीसदी हिस्सा चीन का है। इसके अलावा 19.5 फीसदी हिस्सा जापान और 12 फीसदी भारत का है। लेकिन श्रीलंका पर मौजूद कुल कर्ज में निजी क्षेत्र से लिए कर्जों का सबसे बड़ा हिस्सा है, जिसे मोटे तौर पर पेरिस क्लब के सदस्य देशों की निजी एजेंसियों से लिया गया है।

श्रीलंकाई अधिकारियों ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा है कि ऋण राहत के मामले में चीन मिले-जुले संकेत दे रहा है। एक तरफ वह कहता है कि श्रीलंका से सहयोग करने के लिए वह वचनबद्ध है, लेकिन जब असल में रियायत का मुद्दा आता है, तब उसका ठंडा रुख सामने आता है। चीन ने यह भी साफ कर दिया है कि इस मामले में पेरिस क्लब की तरह बहुपक्षीय वार्ता में वह शामिल नहीं होगा, बल्कि श्रीलंका सरकार के साथ वह द्विपक्षीय वार्ता के जरिए ही किसी समाधान तक पहुंचेगा।

इसके बावजूद हाल में दिखे चीन के रुख के कारण श्रीलंका की उम्मीद कुछ बढ़ी है। चीन ने हाल में कई देशों को कर्ज राहत दी है। उनमें जाम्बिया भी है। लेकिन कुछ अधिकारियों ने ध्यान दिलाया है कि जाम्बिया के डिफॉल्ट करने (खुद को कर्ज चुकाने में अक्षम घोषित करने) के दो साल बाद जाकर चीन ने उसे यह राहत दी। इन अधिकारियों को आशंका है कि अगर चीन ने श्रीलंका के मामले में भी उतना ही समय लिया, तो देशवासियों की बदहाली हद पार कर जाएगी।

ऐसी ही आशंकाओं के कारण चीन के खिलाफ अब श्रीलंका में खुल कर लोग अपनी नाराजगी जता रहे हैं। बीते हफ्ते यह मामला संसद में भी उठा था, जब एक सांसद ने चेतावनी दी थी कि चीन की लेटलतीफी जारी रहने पर श्रीलंका में उसके खिलाफ जन प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।

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