बंगलूरू में वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या को लेकर पूरी दुनिया के मीडिया ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। मीडिया ने लिखा कि पत्रकार की हत्या ने एक बार फिर देश को झकझोर दिया है। जर्मनी की रेडियो सेवा ने बोली का जवाब गोली से देने संबंधी खबर को प्रमुखता दी है।
अमेरिकी अखबार ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने इस खबर को प्रमुख स्थान देते हुए भारत में पत्रकारों की हत्या को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। अखबार ने इसके पहले मारे गए पत्रकारों की सूची भी दी है। उसने 2013 में नरेंद्र दाभोलकर, 2015 में गोविंद पनसारे और 216 में कलबुर्गी हत्याकांड को भी याद किया।
‘वाशिंगटन पोस्ट’ ने एजेंसी से जारी इस खबर को अपने ऑनलाइन संस्करण में प्रमुख स्थान दिया है। लंदन से प्रकाशित ‘आईबी टाइम्स’ ने पत्रकार गौरी लंकेश की घर के बाहर हुई हत्या पर लिखा कि पिछले चार वर्षों में चौथी बार किसी विवेकवादी और धर्मनिरपेक्ष और वामपंथी लेखक की हत्या हुई है। उसने लिखा कि लंकेश ने हिंदुत्व विरोधी लेखन में अपनी पहचान बनाई थी।
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जर्मनी की रेडियो सेवा ‘दाइचे वेले’ ने अपनी वेबसाइट पर गौरी लंकेश की खबर को प्रमुख खबर बनाते हुए सोशल मीडिया पर कुलदीप कुमार की टिप्पणी को प्रमुखता दी है जिसमें लिखा है कि - ‘अब देश के लोगों को तय करना है कि क्या वे ऐसे माहौल में रहना चाहेंगे जहां बोली का जवाब गोली है।’
‘ऑस्ट्रेलिया ऑनलाइन’ ने गौरी लंकेश को लगातार मिलने वाली धमकियों को प्रमुखता देते हुए लिखा कि सोशल मीडिया पर भी भारत में पत्रकारों के खिलाफ जहरीला प्रचार चलता है जो गलत है। पाक अखबार ‘डॉन’ ने लिखा है कि भारत में तथाकथित गोरक्षक दलों द्वारा बेगुनाह लोगों की पिटाई और हत्या की कई घटनाएं हुई हैं ऐसे में एक वामपंथी विचारधारा की पत्रकार की हत्या दुर्भाग्यपूर्ण है।