अंतरराष्ट्रीय आपराध न्यायालय (आईसीसी) के एक न्यायिक पैनल ने इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को गिरफ्तार न करने के मामले में हंगरी को न्यायालय की निगरानी संस्था को सौंप दिया है। यह कदम इस आधार पर उठाया गया है कि हंगरी का ऐसा व्यवहार न्यायालय की न्याय सुनिश्चित करने की क्षमता को कमजोर करता है।
नेतन्याहू ने अप्रैल में हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट का दौरा किया था, जहां उनका प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन ने राजकीय स्वागत किया था, जबकि नेतन्याहू के खिलाफ आईसीसी द्वारा गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था। आईसीसी ने नेतन्याहू और पूर्व रक्षा मंत्री योआव गैलंट पर गाजा युद्ध के दौरान मानवता के खिलाफ अपराध करने के आरोप लगाए हैं।
इस्राइल ने खारिज किए आईसीसी के आरोप
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि किसी भी सदस्य देश को आईसीसी के आदेशों का पालन करना होता है और हंगरी द्वारा गिरफ्तारी में असफलता एक गंभीर उल्लंघन है। बता दें कि इस्राइल अंतरराष्ट्रीय आपराध न्यायालय का सदस्य नहीं है और उसने अपने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर लगाए गए अपराधों के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
हंगरी के रवैए से भड़का आईसीसी
गुरुवार देर रात जारी एक आदेश में तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि हंगरी के लिए सहयोग करने की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय थी और नेतन्याहू को गिरफ्तार न करना न्यायालय के कार्यान्वयन की क्षमता को गंभीर रूप से कमजोर करता है।
आईसीसी के पास स्वयं का कोई पुलिस बल नहीं है और वह दुनियाभर के देशों पर गिरफ्तारी वारंट लागू करने के लिए निर्भर करता है। न्यायालय की निगरानी संस्था "असेम्बली ऑफ स्टेट्स पार्टीज़" के पास हंगरी पर कड़ी कार्रवाई करने की सीमित शक्तियाँ हैं। यह निकाय दिसंबर में अपनी वार्षिक बैठक में आगे की कार्रवाई पर विचार करेगा।
हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन ने नेतन्याहू को गिरफ्तार न करने के फैसले का बचाव किया है। उन्होंने नेतन्याहू की यात्रा के दौरान कहा कि आईसीसी के प्रति उनका समर्थन आधा-अधूरा है और हंगरी ने आईसीसी से बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
आईसीसी ने हंगरी की उस दलील को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि हंगरी की संसद ने अदालत के कानूनों को अपने देश के कानून में शामिल नहीं किया है। अदालत ने लिखा,ऐसा कानून लागू कराना हंगरी की जिम्मेदारी थी।