रूस और यूक्रेन के बीच लगभग चार साल से जारी संघर्ष दिन-प्रतिदिन और भयावह होता जा रहा है। शांति स्थापना की कोशिशें भी नाकाम होती दिख रही है। इसी बीच केन्या की नेशनल इंटेलिजेंस सर्विस की सामने आई रिपोर्ट में किए गए दावों ने रूस की मंशा पर सैकड़ों सवाल खड़े कर दिए हैं। इसमें बताया गया है कि लगभग 1,000 केन्याई युवाओं को रूस की सेना में यूक्रेन में लड़ने के लिए भर्ती किया गया, लेकिन उन्हें इसके पहले झूठे वादों के जरिए भटकाया गया था। उन्हें यह झूठा भरोसा दिलाया गया कि उन्हें रूस में पेशेवर नौकरियां मिलेंगी, जबकि असल में उन्हें युद्धभूमि पर भेज दिया गया।
बता दें कि रिपोर्ट बुधवार को केन्या की संसद में पार्लियामेंटरी लीडर किमानी इचुंगवाह ने पेश की। उन्होंने आरोप लगाया कि रूस के दूतावास के अधिकारी और कुछ रोजगार एजेंसियां मिलकर केन्याई युवाओं को धोखा देने में शामिल थीं। उन्होंने कहा कि रूस के दूतावास ने इन युवाओं को केवल टूरिस्ट वीजा जारी किए।
ये भी पढ़ें:- 'मेरे रास्ते पर नहीं आया तो चीजें बहुत बुरी होंगी': ट्रंप की ईरान को खुली धमकी! कहा- 10 दिन में लेंगे फैसला
रूस के दूतावास ने किया इनकार
हालांकि रूस के दूतावास ने इन आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी किसी को यूक्रेन में लड़ने के लिए वीजा नहीं दिया। दूतावास ने यह भी कहा कि रूस विदेशी नागरिकों को स्वेच्छा से अपनी सेना में शामिल होने से रोकता नहीं है। दूसरी ओर इचुंगवाह ने संसद में बताया कि नेशनल इंटेलिजेंस सर्विस की रिपोर्ट के अनुसार 89 केन्याई युवाओं को फ्रंटलाइन पर भेजा गया, 39 को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा और 28 अब भी अज्ञात हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कुछ युवा घर लौट आए। इसके साथ ही कम से कम एक की मौत की भी पुष्टि हुई है।
केन्याई अधिकारी के लिए चेतावनी भी
रिपोर्ट में उन भर्ती एजेंसियों के बारे में भी जानकारी दी गई है, जिन्होंने कथित तौर पर केन्याई युवाओं को रूस भेजा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर किसी केन्याई अधिकारी ने मास्को में इस घोटाले में भाग लिया, तो उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाएगा। केन्या के विदेश मंत्रालय ने पहले ही इस मामले को गंभीरता से लिया है और नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। इससे पहले पिछले साल दो भर्ती एजेंट गिरफ्तार किए गए थे, जिन्हें जमानत पर छोड़ दिया गया है और अब उनका मुकदमा चल रहा है।
ये भी पढ़ें:- कितना बदला AI?: सैम ऑल्टमैन ने कहा- 14 महीनों में 1000 गुना किफायती हुआ एआई, लेकिन आगे यह रफ्तार मुमकिन नहीं
केन्याई परिवारों ने सरकार से की थी मांग
गौरतलब है कि पिछले कुछ हफ्तों में कई केन्याई परिवारों ने सरकार से अपने परिजनों को रूस से लौटाने की मांग की थी। दावा किया गया कि कुछ युवाओं को फ्रंटलाइन पर लड़ने के लिए मजबूर किया गया और कुछ यूक्रेन में युद्धकैदी बने हुए हैं। जो केन्याई वापस लौटे हैं, उन्होंने बताया कि उन्हें इलेक्ट्रिशियन और प्लंबर जैसी पेशेवर नौकरियों का वादा किया गया था। लेकिन असल में वे रूस भेजे गए और उन्हें युद्ध प्रशिक्षण भी बहुत कम या बिल्कुल नहीं दिया गया।