विदेश मंत्रालय को सूचित किया गया है कि जैश काडर की एक बहुत बड़ी संख्या अफगानिस्तान के प्रांत कोट और मोमनदर (ननगरहार), संगुई और मरजा (हेलमंद), लोगान और नावा (गजनी), जुरमट (पकटिया), कुनार, फारयाब और कुंडूज में शिफ्ट हो गई है। इन्होंने तालिबान आतंकियों से हाथ मिला लिया है।
खुफिया रिपोर्ट से पता चला है कि तालिबान और हक्कानी नेटवर्क ने जैश के मुखिया मौलाना मसूद अजहर को फरवरी 2019 में शरण देने की पेशकश की थी लेकिन अजहर को लगा कि वह बहावलपुर में पाकिस्तानी सेना की सुरक्षा में ज्यादा सुरक्षित है।
अफगानिस्तान में जेईएम के आतंकियों की मौजूदगी का पता तब चला जब दो आतंकियों सेदिक अकबर और अताउल्लाह को अफगान राष्ट्रीय सुरक्षा बल ने इस साल जनवरी में उस वक्त गिरफ्तार किया जब वह जलालाबाद से काबुल की ओर जा रहे थे। इन्होंने बताया था कि वह काबुल और कंधार में स्थित भारतीय दूतावास की रेकी करने जा रहे थे। इसके अलावा एलईटी ने अफगानिस्तान के ननगरहार, नूरिस्तान, कुनार, हेलमंद और कंधार प्रांत में प्रशिक्षण शिविर खोल रखे हैं।