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अफ्रीकी देशों में बढ़ता जा रहा है चीन का असर, स्कूलों में सिखाई जा रही मंदारिन

Shilpa Thakur
Updated Sun, 14 Apr 2019 06:37 PM IST
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अफ्रीका में बढ़ता चीनी प्रभाव - फोटो : social media

दुनियाभर में कई स्कूल ऐसे हैं, जहां अपने देश का राष्ट्रीय गान गाया जाता है। कुछ ऐसा ही नजारा अफ्रीकी देश केन्या की राजधानी नैरोबी में भी देखा गया। लेकिन हैरानी की बात ये थी कि यहां अपने देश का नहीं बल्कि चीन का राष्ट्रीय गान गाया जा रहा था। यहां कक्षा में मौजूद 20 बच्चे ये गीत गा रहे थे। इस गाने की धुन बिल्कुल वैसी थी, जैसी चीन में नए साल के मौके पर गाए जाने वाले राष्ट्रीय गान की होती है।

यहां स्कूली बच्चे 'मंदारिन' सीख रहे हैं। ये चीन में बोली जाने वाली एक प्रमुख भाषा है। साथ ही यह विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा भी है। यहां के लोगों में मंदारिन भाषा के प्रति लगाव बढ़ता जा रहा है। 



सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक यहां कई बच्चे ऐसे मिल जाएंगे, जो बेहद अच्छी मंदारिन बोलते हैं। माना जा रहा है कि साल 2020 तक केन्या के सभी स्कूलों में मंदारिन आधिकारिक तौर पर सिखाई जाएगी। ऐसे में इसे बोलने वालों की संख्या भी कई गुना तक बढ़ जाएगी। फिलहाल स्कूली पाठ्यक्रम में फ्रेंच, अरेबिक और जर्मन भाषा भी शामिल हैं।

नौरोबी में स्थित इस स्कूल के एक बच्चे वांजिरु का कहना है कि उसने विदेशी भाषाओं में सबसे पहले मंदारिन को इसलिए चुना क्योंकि वह एक विदेशी भाषा सीखना चाहता था। लेकिन इसके पीछे की दूसरी वजह ये है वांजिरु चीन जाना चाहता है और वहां व्यापार भी करना चाहता है।

केन्या इंस्टीट्यूट ऑफ करिकुलम डेवलपमेंट (केआईसीडी) के सीईओ जुलियस जुवान ने चीन की सरकारी मीडिया को बताया, "विश्व अर्थव्यवस्था में चीन का स्थान मजबूत हो गया है। इससे केन्या को भी फायदा हो सकता है, अगर यहां के नागरिक मंदारिन सीखते हैं।"  

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अफ्रीका में बढ़ता चीनी प्रभाव - फोटो : social media
दुनियाभर में कई स्कूल ऐसे हैं, जहां अपने देश का राष्ट्रीय गान गाया जाता है। कुछ ऐसा ही नजारा अफ्रीकी देश केन्या की राजधानी नैरोबी में भी देखा गया। लेकिन हैरानी की बात ये थी कि यहां अपने देश का नहीं बल्कि चीन का राष्ट्रीय गान गाया जा रहा था। यहां कक्षा में मौजूद 20 बच्चे ये गीत गा रहे थे। इस गाने की धुन बिल्कुल वैसी थी, जैसी चीन में नए साल के मौके पर गाए जाने वाले राष्ट्रीय गान की होती है।

यहां स्कूली बच्चे 'मंदारिन' सीख रहे हैं। ये चीन में बोली जाने वाली एक प्रमुख भाषा है। साथ ही यह विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा भी है। यहां के लोगों में मंदारिन भाषा के प्रति लगाव बढ़ता जा रहा है। 

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक यहां कई बच्चे ऐसे मिल जाएंगे, जो बेहद अच्छी मंदारिन बोलते हैं। माना जा रहा है कि साल 2020 तक केन्या के सभी स्कूलों में मंदारिन आधिकारिक तौर पर सिखाई जाएगी। ऐसे में इसे बोलने वालों की संख्या भी कई गुना तक बढ़ जाएगी। फिलहाल स्कूली पाठ्यक्रम में फ्रेंच, अरेबिक और जर्मन भाषा भी शामिल हैं।

नौरोबी में स्थित इस स्कूल के एक बच्चे वांजिरु का कहना है कि उसने विदेशी भाषाओं में सबसे पहले मंदारिन को इसलिए चुना क्योंकि वह एक विदेशी भाषा सीखना चाहता था। लेकिन इसके पीछे की दूसरी वजह ये है वांजिरु चीन जाना चाहता है और वहां व्यापार भी करना चाहता है।

केन्या इंस्टीट्यूट ऑफ करिकुलम डेवलपमेंट (केआईसीडी) के सीईओ जुलियस जुवान ने चीन की सरकारी मीडिया को बताया, "विश्व अर्थव्यवस्था में चीन का स्थान मजबूत हो गया है। इससे केन्या को भी फायदा हो सकता है, अगर यहां के नागरिक मंदारिन सीखते हैं।"  

अफ्रीका में बढ़ता चीनी प्रभाव - फोटो : social media

अफ्रीका में बढ़ता चीनी प्रभाव

बीते दो दशकों में चीन का प्रभाव अफ्रीका में काफी बढ़ता जा रहा है। यहां के लोगों के लिए चीन काफी महत्वपूर्ण देश बन गया है।

इसका एक कारण ये भी है कि चीन ने अपनी बेल्ट एंड रोड (बीआरआई) परियोजना के तहत कई अफ्रीकी देशों को कर्ज दिया है। ये कर्ज हाईवे, बांध, स्टेडियम, हवाईअड्डे और इमारतों के निर्माण के लिए दिया गया है।

वाशिंगटन स्थित 'जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ अडवांस स्टडीज' के 'चाइना अफ्रीका रिसर्च इनीशिएटिव' प्रोगाम के मुताबिक साल 2000 के बाद से अब तक चीन ने अफ्रीकी देशों को 14,300 करोड़ डॉलर का कर्ज दिया है।

केवल केन्या ही ऐसा अफ्रीकी देश नहीं है जहां युवाओं को मंदारिन सिखाई जा रही है, बल्कि उत्तरी अफ्रीका में भी मंदारिन 2014 से एक वैक्लपिक भाषाई कोर्स है। इसके बाद दिसंबर, 2018 में युगांडा में भी कुछ स्कूलों में माध्यमिक कक्षा के छात्रों के लिए इस कोर्स की शुरुआत की गई।

इस मामले में युगांडा के पाठ्यक्रम विशेषज्ञ हेनरी अद्रामुंगिनी का कहना है कि मंदारिन को पाठ्यक्रम में इसलिए शामिल किया गया क्योंकि यह संयुक्त राष्ट्र की कार्य भाषाओं में से एक है। लेकिन छात्रों के पास दूसरी भाषाएं सीखने की पूरी छूट है। 

हेनरी का कहना है कि वह युवाओं को नौकरी, व्यवसाय और शिक्षा के मौके देना चाहते हैं। यही कारण है कि छात्रों को मंदारिन सिखाई जा रही है। यहां एक एनजीओ भी है, जो दुनियाभर में चीनी भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहा है। ये एनजीओ युगांडा के शिक्षकों को मंदारिन की ट्रेनिंग दे रहा है, ताकि वह स्कूली बच्चों को ये भाषा सिखा पाएं। 

अफ्रीका में बढ़ता चीनी प्रभाव - फोटो : social media
इस एनजीओ ने 2005 में यहां काम करना शुरू किया था, और अब इसके 48 सेंटर खुल चुके हैं। इस एनजीओ को हनबन (चाइनीज लैग्वेज काउंसिल इंटरनेश्नल का ऑफिस) द्वारा चलाया जा रहा है। जिसका सारा खर्च चीनी सरकार और इन्हें होस्ट करने वाले विश्वविद्यालय उठाते हैं।

चीनी अफ्रीकी रिश्तों की जानकारी रखने वाले इलैरिया कैरोजा का कहना है कि चीनी संस्कृति को बढ़ावा मिलना चीन के अफ्रीका में प्रभाव बढ़ाने की रणनीति है। साथ ही चीन के विचार भी विदेशों तक आसानी से अपनी पहुंच बनाएंगे। यहां चीनी शिक्षण संस्थानों की संख्या भी बढ़ती जा रही है।

वहीं अफ्रीकी सरकार मंदारिन और चीनी शिक्षण संस्थानों को अफ्रीकी छात्रों के भविष्य के लिए किए जा रहे निवेश के रूप में देख रही है। यहां सरकार का मानना है कि मंदारिन को पाठ्यक्रम में शामिल करने से अफ्रीकी युवाओं को चीन और अफ्रीका में काम करने वाली चीनी कंपनियों में नौकरी मिलेंगी।  

क्या है चिंता की बात?

अफ्रीका के लिए यह एक चिंता की बात है। हेनरी कहती हैं कि अफ्रीकी सरकार को ऐसे शिक्षण संस्थानों पर नजर बनाए रखने की जरूरत है। वो भी ऐसे समय में जब चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी के हस्तक्षेप को देखते हुए अमेरिका में भी ऐसे कई केंद्रों को बंद किया गया है। 

उत्तरी फ्लोरिडा के विश्वविद्यालय के साथ साथ कई अमेरिकी स्कूलों ने कन्फ्यूशियस संस्थानों के साथ अपनी सहभागिता खत्म की है। जिसका कारण इस क्रेंद्र की गतिविधियां बताया गया, जो स्कूल के लक्ष्यों के विपरीत थीं। इस फैसले का अमेरीकी सीनेटर मार्को रुबिओ ने भी स्वागत किया। ठीक इसी तरह अफ्रीकी सरकारों को भी इनपर ध्यान देने की जरूरत है।

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