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Inflation in Europe: मुद्रास्फीति दर गिरने के बावजूद महंगाई के असर से यूरोप को मुक्ति नहीं

Tue, 02 May 2023 05:06 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स

सार

यूरोप में ऊर्जा की कीमत में पिछले साल की तुलना में अब काफी गिरावट आ चुकी है। उससे आम महंगाई दर घटी है। विश्लेषकों का अनुमान है कि अप्रैल के अंत तक यूरोजोन में औसत महंगाई दर गिर कर 6.8 फीसदी आ गई थी...
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Eurozone - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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यूरोप में हाल के महीनों में मुद्रास्फीति दर में गिरावट आई है। लेकिन महंगाई के असर से यूरोपवासियों को लंबे समय तक राहत नहीं मिलेगी। 2020 से 2022 तक आम यूरोपवासियों की वास्तविक आमदनी में 6.5 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। जीवन स्तर पर उसका असर अभी जारी रहने वाला है।

आज भी हालत यह है कि पूरे यूरोप में लोग कॉस्ट ऑफ लिविंग क्राइसिस (महंगाई से पैदा हुआ संकट) का सामना कर रहे हैं। दूसरे विश्व युद्ध के बाद यूरोप में महंगाई के कारण ऐसा संकट कभी नहीं देखा गया था। ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स ने अपने एक विश्लेषण के आधार पर कहा है कि आम लोगों की वास्तविक आमदनी जिस जगह तक पहुंच चुकी थी, अगले वर्ष के अंत तक भी यह उससे कम ही रहेगी।

फाइनेंशियल टाइम्स ने यह विश्लेषण अलग-अलग देशों के सरकारी आंकड़ों और भविष्य का अनुमान लगाने वाली कंपनी कॉन्सेन्सस इकॉननिक्स की भविष्यवाणियों के आधार पर किया है। इस विश्लेषण में बताया गया है कि ऊर्जा और खाद्य पदार्थों की महंगाई के कारण 2020 से 2022 तक यूरोजोन में वास्तविक आमदनी में 6.5 फीसदी की गिरावट आई। अगर 2020 के आरंभ से तुलना करें, तो औसत वास्तविक आय 2024 के अंत तक 06 फीसदी कम रहेगी।

यूरोप में ऊर्जा की कीमत में पिछले साल की तुलना में अब काफी गिरावट आ चुकी है। उससे आम महंगाई दर घटी है। विश्लेषकों का अनुमान है कि अप्रैल के अंत तक यूरोजोन में औसत महंगाई दर गिर कर 6.8 फीसदी आ गई थी। इस ट्रेंड से यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ईसीबी) के अधिकारियों को राहत मिली है। पूरे 2022 में ईसीबी ब्याज दर बढ़ाने की आक्रामक नीति पर चला था। अब उम्मीद है कि वह इस मामले में अपना रुख नरम कर लेगा। ईसीबी इसी हफ्ते के अंत में नई ब्याज दर घोषित करने वाला है।

लेकिन विश्लेषकों ने आगाह किया है कि मुद्रास्फीति दर और ब्याज दर में राहत के बावजूद महंगाई ने जो हालात पैदा किए हैं, उनके असर से लोगों की मुश्किल आगे भी कायम रहेगी। ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट की सेवा देने वाली कंपनी इंटरेक्टिव इन्वेस्टर में निवेश विभाग की प्रमुख विक्टोरिया स्कॉलर ने कहा है- ‘मुद्रास्फीति दर में गिरावट की संभावना है, लेकिन असल में कीमतें नीचे नहीं आ रही हैं। महंगाई के कारण घरेलू बजट पर दबाव अभी बना रहने वाला है।’

इसी का नतीजा है कि यूरोप की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं जर्मनी और फ्रांस में ट्रेड यूनियनें हड़ताल पर जाने को मजबूर हुई हैं। यूरोपियन ट्रेड यूनियन कॉन्फेडरेशन के महासचिव एस्तर लिंच ने फाइनेंशियल टाइम्स से कहा- ‘मुद्रास्फीति में कोई भी गिरावट श्रमिक वर्ग के लिए अच्छी खबर है। लेकिन संकट अभी खत्म नहीं हुआ है। इतने लंबे समय तक तनख्वाह बढ़ी महंगाई की तुलना में कम रही है, इसलिए वेतन वृद्धि की आवश्यकता बनी हुई है। श्रमिक वर्ग की क्रय शक्ति घट गई है।’

विश्लेषकों के मुताबिक सबसे ज्यादा दिक्कत उन गरीब लोगों को झेलनी पड़ रही है, जो अपनी आमदनी का बड़ा हिस्सा खाद्य और अन्य जरूरी चीजों पर खर्च करते हैं। अनुमान है कि इस तबके के लोगों की मुसीबत बनी रहेगी। इसकी वजह यह है कि ऊर्जा की कीमत भले गिरी हो, लेकिन खाद्य पदार्थों की कीमतें अभी भी चढ़ रही हैं।

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