कचरे का पहाड़ (सांकेतिक तस्वीर)
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इंडोनेशिया के सबसे बड़े लैंडफिल में कचरे का एक बड़ा ढेर ढह गया। इस घटना में अबतक पांच लोगों की मौत हो गई है। कई अन्य लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। यह हादसा रविवार देर रात हुई भारी बारिश के कारण हुआ।
यह हादसा राजधानी जकार्ता के पास बेकासी शहर में स्थित बंटारगेबांग वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी में रविवार देर रात हुआ। मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए 300 से ज्यादा बचाव कर्मियों को तैनात किया गया है। बचाव दल भारी मशीनों और खोजी कुत्तों की मदद ले रहे हैं। जकार्ता सर्च एंड रेस्क्यू ऑफिस की प्रमुख देसियाना कार्तिका बहारी ने बताया कि कचरे के ढेर काफी अस्थिर हैं, इसलिए बचाव दल बहुत सावधानी से काम कर रहे हैं।
हादसे का शिकार हुए लोगों में दो कचरा ट्रक ड्राइवर और दो खाने की दुकान चलाने वाले लोग शामिल हैं। ये लोग लैंडफिल के पास काम कर रहे थे या आराम कर रहे थे। राहत की बात यह रही कि चार लोग इस हादसे से सुरक्षित बचने में कामयाब रहे। पुलिस, सेना और वॉलंटियर्स की टीमें अभी भी तीन लापता लोगों की तलाश कर रही हैं। अधिकारियों ने आशंका जताई है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। अभी यह डेटा इकट्ठा किया जा रहा है कि मलबे के नीचे कितनी गाड़ियां और मजदूर फंसे हो सकते हैं।
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नेशनल सर्च एंड रेस्क्यू एजेंसी के वीडियो में खुदाई करने वाली मशीनें कचरे के ढेर को हटाती दिख रही हैं। वहां कई ट्रक और खाने की छोटी दुकानें दबी हुई हैं। नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एजेंसी के प्रवक्ता अब्दुल मुहरी ने बचाव टीमों को सख्त सुरक्षा नियमों का पालन करने की सलाह दी है। वहीं मौसम विभाग ने अगले दो दिनों में बारिश की संभावना जताई है।
बंटारगेबांग लैंडफिल में जकार्ता का ज्यादातर घरेलू कचरा आता है। यह जगह अपनी क्षमता से बहुत ज्यादा भर चुकी है और इसे लेकर पहले भी कई बार चेतावनी दी गई थी। इससे पहले जनवरी में फिलीपींस में भी ऐसा ही हादसा हुआ था। साल 2005 में इंडोनेशिया के बांडुंग में भारी बारिश के बाद कचरा गिरने से 31 लोगों की जान गई थी।
सरकार ने पिछले साल के अंत में इस लैंडफिल को साफ करने के लिए दो साल का समय तय किया था। नए नियमों के तहत अब कचरे को बिजली या ऊर्जा में बदलने की योजना पर काम चल रहा है। इसके लिए निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि खुले में कचरा फेंकने की पुरानी व्यवस्था को बदला जा सके।
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