पश्चिम बंगाल के रास्ते भारत से बांग्लादेश में चावल निर्यात अब जल्दी शुरू होने के आसार हैं। भारत के गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल के गृह सचिव को फिर निर्देश दिए हैं कि वह भारत-बांग्लादेश सीमा तत्काल खोले ताकि वहां लंबे समय से खड़े चावल से लदे ट्रक तत्काल बांग्लादेश भेजे जा सकें।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने बहुत पहले ही पेट्रापोल-बेनापोल सीमा खोलने और ट्रकों की आवाजाही शुरु करने का आदेश दे दिया था, लेकिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे अपने प्रदेश के लिए खतरा बताते हुए लागू नहीं होने दिया था। लेकिन अब केन्द्र सरकार ने एक बार फिर इस मामले में सख्त निर्देश दिए हैं।
तिरुपति एग्री ट्रेड के सीईओ सूरज अग्रवाल के मुताबिक गृह मंत्रालय के आदेश के बावजूद ट्रकों की आवाजाही अभी तक नहीं खोली गई है। लेकिन अब खबर मिली है कि 20 मई से दोनों देशों के बीच चावल निर्यात के लिए पेट्रपोल-बेनापोल सीमा खोल दी जाएगी।
बांग्लादेश, पंजाब और हरियाणा से बासमती चावल का आयात करता है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल से गोविंदभोग चावल का भी आयात होता है।
चूंकि ये लैंडपोर्ट अब भी खोला नहीं जा सका है इसलिए बासमती चावल समुद्र के रास्ते बांग्लादेश भेजने का काम शुरू किया गया है। अडानी विलमार की एक अधिकारी अंगशु मलिक के मुताबिक फिलहाल ये चावल मुंदरा पोर्ट से चित्तगांव पोर्ट भेजे जा रहे हैं।
पश्चिम बंगाल के किसान भी इस इंतजार में बैठे हैं कि बांग्लादेश में उनके चावल का निर्यात कब शुरू हो क्योंकि चावल के दाम लगातार गिर रहे हैं और किसानों को भारी नुकसान हो रहा है।
बज्ञदवान राइस मिल्स एसोसिएशन के सचिव सुब्रत मंडल बताते हैं कि जब से राज्य सरकार ने कोविड-19 की वजह से अगले 6 महीने तक लोगों को मुफ्त राशन देने का एलान किया है, चावल के दाम तेजी से गिरे हैं।
जो स्वर्ण मसूरी चावल 27 रुपये किलो था वह अब 24 रुपये हो गया है, वहीं मिनिकिट चावल 45 रुपए से 36 रुपए प्रति किलो हो गया है। अहर बांग्लादेश से निर्यात शुरू हो जाता है, तो चावल की कीमत फिर बढ़ सकती है। उधर मौसम के उतार चढ़ाव ने भी चावल की फसल को बहुत नुकसान पहुंचाया है।
ये हकीकत है कि बांग्लादेश और भारत के बीच व्यापार के रास्ते खुलना अभी बहुत जरूरी हैं, लेकिन ममता बनर्जी की ये आशंका भी जायज है कि अगर आवाजाही खुलेआम होने लगी तो कोरोना करियर को रोकना मुश्किल हो सकता है और उनके राज्य में हालात बिगड़ सकते हैं।
जाहिर है कि ऐसे में अगर केंद्र ने राज्य सरकार को सीमा खोलने के निर्देश दोबारा भेजे हैं तो उसमें एहतियात के साथ ही कदम उठाने और सोशल डिस्टेंसिंग के साथ ही तमाम दिशा निर्देशों का सख्ती से पालन करते हुए ही ऐसा करने की बात कही गई है।
बेशक ये कारोबारियों के लिए मुश्किल वक्त है, लेकिन सुरक्षा और व्यापार के रास्तों में संतुलन बनाते हुए कोई न कोई रास्ता तलाशने की कोशिश केंद्र भी कर रहा है और राज्य सरकार भी।