रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय छात्रों की बढ़ती उपस्थिति ने अमेरिका के वीजा नीति निर्माताओं को भी पुनर्विचार के लिए मजबूर किया है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) और स्टेट डिपार्टमेंट में एफ-1 और ओपीटी (ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग) वीजा नीति को लेकर कुछ सकारात्मक संशोधन पर चर्चा चल रही है।
अमेरिका में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले भारतीय छात्रों की संख्या ने इस साल नया रिकॉर्ड कायम किया है। वॉशिंगटन पोस्ट में प्रकाशित एक प्रमुख रिपोर्ट में बताया गया है कि 2024-25 शैक्षणिक सत्र में 3.5 लाख से अधिक भारतीय छात्र अमेरिकी विश्वविद्यालयों में नामांकित हुए, जो अब तक की सर्वाधिक संख्या है।
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रिपोर्ट के अनुसार भारतीय छात्रों की बढ़ती उपस्थिति ने अमेरिका के वीजा नीति निर्माताओं को भी पुनर्विचार के लिए मजबूर किया है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) और स्टेट डिपार्टमेंट में एफ-1 और ओपीटी (ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग) वीजा नीति को लेकर कुछ सकारात्मक संशोधन पर चर्चा चल रही है। यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के अंतरराष्ट्रीय शिक्षा निदेशक एलिजाबेथ कार्टर के अनुसार भारतीय छात्र न केवल संख्या में बल्कि शोध, नवाचार और कैंपस नेतृत्व में भी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। वॉशिंगटन पोस्ट ने यह भी बताया कि अमेरिका में आईआईटी, एनआईटी और दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों से स्नातक छात्र उच्च शिक्षा के लिए तेजी से आ रहे हैं और इन छात्रों के उच्च ग्रेड और रिसर्च क्षमताओं ने टॉप यूनिवर्सिटी प्रशासन को भी प्रभावित किया है।
अमेरिकी विवि मानते हैं भारतीयों में लो रिस्क, हाई आउटपुट
भारतीय छात्रों की गणित, विज्ञान और विश्लेषणात्मक सोच में पारंपरिक रूप से मजबूत पकड़ रही है। एनआईटी, बिट्स पिलानी और दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों से आने वाले छात्रों के पास मजबूत अकादमिक रिकॉर्ड, जेईई-गेट जैसी प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं का अनुभव होता है। अमेरिकी विश्वविद्यालय इन्हें 'लो रिस्क, हाई आउटपुट' स्टूडेंट्स मानते हैं, यानी कम जोखिम वाले लेकिन उच्च प्रदर्शन देने वाले विद्यार्थी।
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स्टेम और टेक्नोलॉजी आधारित कार्यक्रमों में बढ़ती विशेषज्ञता
अमेरिकी वि विश्वविद्यालयों में स्टेम (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथमेटिक्स) आधारित पाठ्यक्रमों में सबसे अधिक आवेदन अब भारत से ही आ रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार स्टैनफोर्ड, एमआईटी और यूसी वर्कले जैसे संस्थानों में कंप्यूटर साइंस, एआई और डेटा साइंस के स्नातक/परास्नातक कार्यक्रमों में भारतीय छात्रों की उपस्थिति लगातार बढ़ रही है।