ब्रिटेन में भारतीय छात्रों को दिए जाने वाले वीजा की संख्या में गिरावट देखने को मिल रही है। ब्रिटेन के गृह मंत्रालय की ओर से गुरुवार को जारी किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जून 2025 तक भारतीय छात्रों को कुल 98,014 वीजा मिले। यह संख्या चीनी छात्रों को मिले 99,919 वीजा से कम है। हालांकि, दोनों देशों के छात्रों की संख्या पिछले साल की तुलना में घटी है। ताजा आंकड़ों के अनुसार भारतीय छात्रों में 11 प्रतिशत और चीनी छात्रों में 7 प्रतिशत की गिरावट आई।
इस बीच, ब्रिटेन में अवैध आव्रजन पर की गई कार्रवाई के आंकड़े भी सामने आए। पिछले एक साल में भारतीय नागरिकों की डिटेंशन (हिरासत) के मामले लगभग दोगुने (108 प्रतिशत वृद्धि) हो गए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, 2,715 भारतीयों को इमिग्रेशन नियम तोड़ने के कारण हिरासत में लिया गया। हालांकि, इनमें से अधिकतर को जमानत पर रिहा कर दिया गया।
गृह मंत्रालय के अनुसार, इसी अवधि में 1.11 लाख लोगों ने शरण (असाइलम) के लिए आवेदन किया, जो 1979 के बाद से सबसे बड़ी संख्या है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी स्थित माइग्रेशन ऑब्जर्वेटरी ने बताया कि ब्रेक्जिट के बाद से अध्ययन और काम के वीजा धारकों की ओर से शरण के लिए आवेदन बढ़े हैं। इस श्रेणी में पाकिस्तानी और बांग्लादेशी शीर्ष पर हैं, जबकि भारतीय छठे स्थान पर हैं।
वर्क वीजा में भी गिरावट
ब्रिटेन में कुल प्रवासियों की संख्या में भी कमी दर्ज हुई है। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 12 महीनों में कुल वीजा में 30 प्रतिशत की गिरावट आई है। खासतौर पर वर्क वीजा में बड़ी कटौती देखी गई, जिसमें भारतीय नागरिकों का दबदबा रहा है। गृह मंत्री यवेट कूपर ने कहा, हम कानूनी प्रवास पर नियंत्रण कर रहे हैं। इस साल वर्क वीजा में 48 प्रतिशत की कमी आई है। नए वीजा नियम और उच्च कौशल आवश्यकताएं लागू होने से आने वाले समय में यह संख्या और गिरेगी।