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Veerabhadran Ramanathan Crafoord Prize: भारतीय वैज्ञानिक रामनाथन को मिलेगा क्रैफोर्ड प्राइज, जानिए उपलब्धि

Mon, 02 Feb 2026 10:08 AM IST
अमन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन डीसी

सार

भारतीय मूल के वैज्ञानिक वीरभद्रन रामनाथन को 2026 का प्रतिष्ठित क्रैफोर्ड पुरस्कार मिला है। इसे जियोसाइंसेज का नोबेल माना जाता है। उन्होंने क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) और प्रदूषण के जलवायु पर असर को लेकर महत्वपूर्ण खोज की है। उनकी रिसर्च ने ग्लोबल वार्मिंग को समझने और पर्यावरण बचाने की अंतरराष्ट्रीय संधियों में बड़ी भूमिका निभाई है।
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वीरभद्रन रामनाथन - फोटो : @WetTribe
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विस्तार
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रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने भारतीय मूल के जलवायु वैज्ञानिक वीरभद्रन रामनाथन को 2026 के क्रैफोर्ड पुरस्कार के लिए चुना है। इस सम्मान को जियोसाइंसेज का नोबेल भी कहा जाता हैं। रामनाथन को यह पुरस्कार प्रदूषण फैलाने वाले तत्वों और वायुमंडल के 'ब्राउन क्लाउड्स' पर उनके दशकों पुराने शोध के लिए मिला है। उनके काम ने ग्लोबल वार्मिंग को समझने का नजरिया बदल दिया है।
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इन क्षेत्र में हासिल की है बड़ी उपलब्धि
82 साल के रामनाथन ने 1975 में नासा में काम करते हुए एक बड़ी खोज की थी। रामनाथन ने रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज को बताया कि 1975 तक, हम सोचते थे कि ग्लोबल वार्मिंग मुख्य रूप से CO₂ से होती है, लेकिन रेफ्रिजरेटर और एयरोसोल में इस्तेमाल होने वाली क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) गैसें कार्बन डाइऑक्साइड के मुकाबले 10,000 गुना ज्यादा प्रभावी ढंग से ऊष्मा को अवशोषित करते हैं। इस खोज से पहले लोग मानते थे कि ग्लोबल वार्मिंग सिर्फ कार्बन डाइऑक्साइड से होती है।

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भारत से क्या है ताल्लुक
रामनाथन का जन्म मदुरै में हुआ और उनकी पढ़ाई चेन्नई में हुई। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत सिकंदराबाद की एक फ्रिज फैक्ट्री में इंजीनियर के रूप में की थी। यहीं उन्होंने पहली बार इन गैसों पर काम किया। बाद में उन्होंने अन्नामलाई यूनिवर्सिटी और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस से डिग्री हासिल की।

उन्होंने 'इंडियन ओशन एक्सपेरिमेंट' के जरिए दक्षिण एशिया के ऊपर प्रदूषण की काली परतों (ब्राउन क्लाउड्स) की पहचान की। उनकी इस स्टडी ने वायु प्रदूषण को कमजोर भारतीय मानसून और हिमालय के ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने से जोड़ा।
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स्टॉकहोम में होंगे सम्मानित
फिलहाल वह कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं। उन्होंने जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर दुनिया के बड़े नेताओं और वेटिकन को भी सलाह दी है। उनके शोध ने 'मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल' जैसी अंतरराष्ट्रीय संधियों को मजबूत बनाया, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गैसों पर रोक लगी। इस पुरस्कार में उन्हें स्वर्ण पदक और करीब नौ लाख डॉलर (आठ मिलियन स्वीडिश क्रोनर) की राशि मिलेगी। यह सम्मान मई 2026 में स्टॉकहोम में एक समारोह में दिया जाएगा।

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