डेमोक्रेटों ने पहली बार किसी अश्वेत और दक्षिण एशियाई महिला सीनेटर कमला हैरिस को औपचारिक रूप से उपराष्ट्रपति के लिए नामित किया और हैरिस ने इसे स्वीकार कर इतिहास रच दिया। डेमोक्रेट मानते हैं कि गिरावट के इस दौर में हैरिस की कोशिशें राष्ट्रपति ट्रंप को हराने के लिए गठबंधन को सक्रिय करेंगी। पार्टी के एलान के बाद हैरिस भावुक हो गईं और उन्होंने अपनी मां को याद किया।
भारतवंशी कमला हैरिस ने अपने भाषण में खुद को भारत और जमैका के आप्रवासियों की बेटी बताते हुए ट्रंप पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, देश में आज भी नस्लवाद जैसी समस्या मौजूद हैं। देश इससे बंटा हुआ महसूस कर रहा है।
उन्होंने कहा कि नस्लवाद को खत्म करने के लिए कोई वैक्सीन (टीका) नहीं है। हमें ही इसके लिए काम करना होगा। पुलिस के हाथों मारे गए अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड, उनके जैसे कई लोगों और हमारे बच्चों के लिए हमें एकजुट होना होगा। हैरिस ने कहा, ट्रंप की नाकामी के कारण देश भर में बहुत सारे लोगों की आजीविकाएं छिन गई हैं और कई लोगों की जानें भी जा चुकी हैं।
उन्होंने जोर दिया कि अमेरिकी मतदाता जो बिडेन का समर्थन करें और उन्हें चुनें क्योंकि वे देश को एकजुट कर सकते हैं। देश को मौजूदा हालातों से बाहर निकालने की उम्मीदों के लिए हमें राष्ट्रपति पद के लिए जो बिडेन को वोट देना ही होगा।
मजबूत है बिडेन का दृष्टिकोण
कमला हैरिस ने कहा कि देशवासियों को बिडेन को राष्ट्रपति बनाने के लिए मतदान करना चाहिए। पूर्व उपराष्ट्रपति जो बिडेन का दृष्टिकोण एक ऐसा अमेरिका बनाना है जहां कोई भेदभाव नहीं होगा। सभी लोगों का स्वागत किया जाएगा। उनसे इस बात पर भेदभाव नहीं किया जाएगा कि वे कैसे दिखते हैं, कहां से आए हैं और किससे प्यार करते हैं।
काश, आज मां यहां होतीं
उन्होंने कहा, काश आज मां यहां होतीं, लेकिन मुझे पता है कि वह आज रात मुझे देख रही हैं। उनकी मां श्यामला गोपालन भारत के तमिलनाडु राज्य से थीं जिनका एक दशक पूर्व निधन हो चुका है। उन्होंने गोपालन का कई बार जिक्र किया। इस मौके पर हैरिस ने उन मूल्यों पर भी बात की, जो उन्हें उनकी मां ने सिखाए थे। उन्होंने कहा, विश्वास के साथ चलते रहना चाहिए।
उपराष्ट्रपति का चुनाव लड़ने वाली पहली भारतवंशी महिला
हैरिस देश की पहली ऐसी भारतवंशी और अश्वेत अमेरिकी एशियाई महिला हैं जो उपराष्ट्रपति चुनाव लड़ेंगी। इससे पहले 2008 में रिपब्लिकन पार्टी ने सारा पैलिन को और 1984 में डेमोक्रेटिक पार्टी ने गिरालडिन फेरारो को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन दोनों ही चुनाव हार गई थीं। हालांकि दोनों प्रमुख अमेरिकी पार्टियों ने अब तक किसी भी अश्वेत महिला को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार नहीं बनाया है।