भारतीय नौसेना की पनडुब्बी आईएनएस शाल्की कोलंबो पहुंच चुकी है। नौसेना ने जानकारी देते हुए बताया कि शाल्की दो दिवसीय यात्रा के लिए श्रीलंका पहुंची है।
दो से चार अगस्त के लिए श्रीलंका पहुंची 64.4 मीटर लंबी पनडुब्बी में 40 लोगों का दल मौजूद है। इसकी कमान कमांडर राहुल पटनायक के पास है।
कमांडर राहुल पटनायक ने बताया कि कोलंबो में दौरे के दौरान श्रीलंका नौसेना कर्मियों को पनडुब्बी के परिचालन के लिए जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा, पनडुब्बी के चालक दल के सदस्यों से देश के कुछ पर्यटक आकर्षणों का पता लगाने की भी उम्मीद है।
यात्रा के दौरान, कमांडिंग ऑफिसर का पश्चिमी नौसेना क्षेत्र के कमांडर, रियर एडमिरल डब्ल्यूडीसीयू कुमारसिंघे से मुलाकात भी होगी। जिसके बाद जहाज पर श्रीलंकाई नौसेना कर्मियों का दौरा और ब्रीफिंग होगी।
श्रीलंका में भारतीय उच्चायोग भी करेंगे पनडुब्बी का दौरा
भारतीय नौसेना ने जानकारी देते हुए बताया कि श्रीलंका में भारतीय उच्चायोग और श्रीलंका रक्षा बल के कर्मियों का भी पनडुब्बी के दौरा करने का कार्यक्रम है। नौसेना अधिकारी ने कहा कि भारत और श्रीलंका के बीच बौद्धिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और भाषाई संपर्क की विरासत है और दोनों देशों के बीच ढाई हजार सालों से भी ज्यादा पुराने संबंध हैं। दोनों देश अंतरराष्ट्रीय हित के प्रमुख मुद्दों पर व्यापक समझ साझा करते हैं।
देश की पहली पनडुब्बी आईएनएस कुरसुरा, जो अब बन गई संग्रहालय
कमांडर ए. ऑदित्तो के आदेश के तहत 18 दिसंबर, 1969 को आईएनएस कुरसुरा रीगा को पूर्व सोवियत संघ (अब रूस) में कमीशन किया गया था। इस पनडुब्बी ने 20 फरवरी, 1970 को बालरिस्क से अपने मार्ग पर आगे बढ़ना शुरू किया। भारतीय नौसेना में कुरसुरा के कमीशन से इसके तीसरे आयाम की वृद्धि देखी गई। यह भारतीय नौसेना पनडुब्बी शाखा की नींव का पत्थर थी। आईएनएस कुरसुरा को 27 फरवरी, 2001 को डिकमीशन किया गया था। इसके बाद यह संग्रहालय में तब्दील कर दी गई।