- वैश्विक स्तर पर सर्वे में शामिल 34 फीसदी उत्तरदाताओं ने सामाजिक प्रभाव को सफलता के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना। जबकि 29 फीसदी भारतीय अधिकारियों के लिए यह प्राथमिकता है।
- भारत में 85 ने बताया कि उनके संस्थान ने ऐसा उत्पाद या सर्विस तैयार की जिससे समाज पर ज्यादा सकारात्मक प्रभाव पड़ें। वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 73 प्रतिशत रहा।
- 58 प्रतिशत भारतीय अधिकारियों ने बताया कि उनके संगठन में निर्णय लेने की प्रक्रिया स्पष्ट परिभाषित है। यह आंकड़ा सर्वे में शामिल किसी भी देश के जवाब देने वालों में सबसे ज्यादा है।
- 65 प्रतिशत भारतीय उत्तरदाताओं ने बताया कि उनका नेतृत्व इस बात की अनुमति देता है कि नवाचार में फेल रहने पर सीखने को मिलेगा। वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 69 फीसदी रहा।
- 55 फीसदी भारतीय अधिकारी ‘उद्योग 4.0’ में प्रौद्योगिकी के नैतिक उपयोग को लेकर चिंतित हैं और इसे लेकर जरूरी कदम उठा रहे हैं। जबकि वैश्विक स्तर पर यह चिंता 30 फीसदी में ही है।
- भारतीय अधिकारी इस बात को लेकर कम आश्वस्त हैं कि उन्हें भविष्य के लिए किस तरह के कुशल कार्यबल की जरूरत है। भारतीयों में आंकड़ा 53 जबकि वैश्विक स्तर पर 63 फीसदी है।
- भारत के 72 फीसदी अधिकारियों ने कहा कि वे अपने मौजूदा कर्मचारियों को भविष्य की जरूरतों के लिए प्रशिक्षित करेंगे जबकि वैश्विक स्तर पर ऐसा जवाब देने वाले केवल 43 फीसदी ही रहे।