व्हाइट हाउस ने भी जारी किया स्पष्टीकरण
वहीं, इस बीच वीजा के नए नियमों को लेकर कई गलत खबरों को व्हाइट हाउस ने खारिज किया है और स्पष्टीकरण जारी किया है। वरिष्ठ अमेरिकी प्रशासनिक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह नया शुल्क केवल नए H-1B वीजा आवेदनों पर लागू होगा। वर्तमान में वीजा धारक या जो लोग अमेरिका से बाहर हैं, उन्हें इस शुल्क का सामना नहीं करना पड़ेगा और उन्हें अमेरिका लौटने में जल्दबाजी करने की आवश्यकता नहीं है। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने भी नए नियमों को लेकर अहम जानकारी दी है।
- यह 1 लाख डॉलर शुल्क वार्षिक नहीं है, बल्कि एकमुश्त (one-time) शुल्क है, जो केवल नये H-1B आवेदन पर लागू होगा।
- जो लोग पहले से H-1B वीजा धारक हैं और फिलहाल देश से बाहर हैं, उन्हें दोबारा अमेरिका लौटने के लिए यह शुल्क नहीं देना होगा।
- मौजूदा H-1B वीजा धारक सामान्य रूप से अमेरिका आ-जा सकते हैं, इस नई घोषणा से उनकी री एंट्री पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
- यह नियम केवल नए वीज़ा पर लागू होगा, नवीनीकरण या मौजूदा वीजा धारकों पर नहीं।
- यह प्रावधान सबसे पहले आगामी H-1B लॉटरी चक्र से लागू होगा।
एच-1बी वीजा पर ट्रंप का क्या फैसला?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एच-1बी वीजा को लेकर जो नए आदेश जारी किए हैं, उसके मुताबिक एच-1बी वीजा की फीस को एक लाख डॉलर (करीब 88 लाख रुपये) कर दिया गया है। ट्रंप प्रशासन ने इसकी वजह बताते हुए कहा कि एच-1बी वीजा का गलत इस्तेमाल हो रहा है। इसलिए ऐसा कदम उठाया गया है। जारी आदेश में बताया गया है कि 2000 से 2019 के बीच अमेरिका में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, गणित (एसटीईएम) से जुड़ी नौकरियां 44.5 फीसदी बढ़ीं, लेकिन इस दौरान इन नौकरियों में विदेशी पेशेवरों का आंकड़ा 100 फीसदी बढ़ गया।
ट्रंप प्रशासन ने इन आंकड़ों के जरिए संदेश दिया है कि अमेरिका में जितनी नौकरियां बढ़ी हैं, उनमें से सबसे बड़ा हिस्सा विदेशी पेशेवरों के पास गया है। आदेश में कहा गया है कि कंप्यूटर और गणित से जुड़ी नौकरियों में विदेशी वर्कर्स की हिस्सेदारी साल 2000 में 17.7% से बढ़कर 2019 में 26.1% हो गई। आईटी कंपनियां सस्ते विदेशी वर्कर्स लाकर अमेरिकियों की नौकरियां छीन रही हैं।
21 सितंबर की रात से लागू होगा ट्रंप का आदेश
ट्रंप के इस अचानक फैसले का अमेरिका में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों पर बहुत गहरा असर पड़ेगा। राष्ट्रपति का यह आदेश 21 सितंबर की रात 12:01 बजे (स्थानीय समयानुसार) से लागू होगा। जैसे ही यह घोषणा हुई, वीजा धारकों और कंपनियों में अफरा-तफरी मच गई। आव्रजन वकीलों और नियोक्ताओं ने सलाह दी कि जो एच-1बी वीजा धारक या उनके परिवारजन काम या छुट्टी के सिलसिले में अमेरिका से बाहर हैं, वे तुरंत अगले 24 घंटे में लौट आएं, वरना उन्हें अमेरिका में प्रवेश से रोका जा सकता है।
अमेरिका में भारतीय पेशेवरों की कमाई का जीडीपी में योगदान करीब एक फीसदी
अमेरिका में एच-1बी वीजा पर काम करने वाले भारतीय पेशेवर न केवल अमेरिकी टेक सेक्टर का अहम हिस्सा हैं, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था पर भी अप्रत्यक्ष असर डालते हैं। ताजा अनुमान बताते हैं कि इनकी कुल कमाई भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 1 से 1.2 प्रतिशत के बराबर बैठती है। भारत हर साल अमेरिकी एच-1बी वीजा का सबसे बड़ा लाभार्थी है।
अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवाओं (यूएससीआईएस) और नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी (एनएफएपी) की रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका में एच-1बी वीजा पर वर्तमान में 3.5 से 4 लाख भारतीय पेशेवर काम कर रहे हैं। यह संख्या कुल एच-1बी धारकों का लगभग 71 प्रतिशत है।
अमेरिका में काम कर रहे एक भारतीय पेशेवर की औसत सालाना कमाई लगभग 1,00,000 डॉलर मानी जाती है। इस हिसाब से भारतीय पेशेवरों की कुल कमाई सालाना 35 से 40 अरब डॉलर (29 से 33 लाख करोड़ रुपये) के बीच बैठती है। भारत की जीडीपी 2024-25 के लिए वर्ल्ड बैंक और आईएमएफ के अनुमानों के अनुसार लगभग 3.7 ट्रिलियन डॉलर (305 लाख करोड़ रुपये) है। तुलना करने पर साफ होता है कि भारतीय पेशेवरों की अमेरिकी कमाई भारत की जीडीपी का लगभग 1 से 1.2 प्रतिशत बनती है।