रोम में भारतीय दूतावास ने एक भारतीय नागरिक द्वारा साझा किए गए वायरल वीडियो को झूठा और मनगढ़ंत करार दिया है। दूतावास ने स्पष्ट किया कि उक्त व्यक्ति ने सुरक्षा जांच के लिए अपना पासपोर्ट या पहचान पत्र दिखाने से मना कर दिया था, जिसके कारण उसे मिलने नहीं दिया गया।
इटली की राजधानी रोम में स्थित भारतीय दूतावास ने एक भारतीय नागरिक द्वारा सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। दूतावास ने बुधवार को एक सख्त स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि वायरल वीडियो में किए गए सभी दावे पूरी तरह से झूठे और मनगढ़ंत हैं। दूतावास की ओर से यह प्रतिक्रिया तब आई जब उस व्यक्ति ने राजनयिक मिशन पर मदद न देने और दुर्व्यवहार करने के गंभीर आरोप लगाए, जिससे डिजिटल दुनिया में काफी हलचल मच गई थी।
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क्या है वायरल वीडियो और दूतावास की सच्चाई?
रोम स्थित भारतीय दूतावास ने इस पूरे विवाद की असलियत बताते हुए कहा कि वह व्यक्ति मदद मांगने के बहाने दूतावास के परिसर में आया था। लेकिन जब सुरक्षाकर्मियों ने उससे मानक सुरक्षा नियमों के तहत उसकी पहचान पूछी, तो उसने सहयोग करने से साफ इनकार कर दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दूतावास ने जानकारी दी कि वे उस व्यक्ति से मिलने के लिए पूरी तरह तैयार थे, लेकिन उसने अपनी पहचान या पासपोर्ट दिखाने से मना कर दिया। किसी भी देश के दूतावास में प्रवेश के लिए कुछ बुनियादी सुरक्षा प्रोटोकॉल होते हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य है, लेकिन इस व्यक्ति ने जानबूझकर नियमों को तोड़ा।
व्यक्ति ने दूतावास पर क्या आरोप लगाए थे?
सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो में भारतीय मूल के व्यक्ति ने आरोप लगाया था कि रोम में दूतावास के कर्मचारियों ने उसके साथ धक्का-मुक्की की और उसे शारीरिक रूप से परेशान किया। उसने वीडियो में ऐसा माहौल दिखाने की कोशिश की जैसे दूतावास के दरवाजे आम नागरिकों के लिए बंद हैं। हालांकि, दूतावास ने स्पष्ट किया कि वीडियो में सच्चाई को छिपाया गया है। सच्चाई यह है कि उस व्यक्ति ने खुद अपनी पहचान बताने से इनकार करके बैठक के रास्ते में बाधा पैदा की और बाद में दूतावास की छवि खराब करने के लिए गलत तथ्यों के साथ वीडियो साझा किया।
सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन क्यों है जरूरी?
दूतावास ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि सुरक्षा प्रक्रियाएं रूटीन का हिस्सा हैं और विदेशों में किसी भी राजनयिक मिशन की सुरक्षा और कामकाज के लिए बेहद जरूरी हैं। बिना पहचान पत्र देखे किसी भी अनजान व्यक्ति को संवेदनशील क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति देना जोखिम भरा हो सकता है। दूतावास ने यह भी साफ किया कि स्टाफ ने किसी भी तरह का दुर्व्यवहार नहीं किया, बल्कि केवल अपने आधिकारिक कर्तव्य का पालन किया। नियमों का पालन न करने के बावजूद मामले को तोड़-मरोड़कर पेश करना दूतावास को बदनाम करने की कोशिश है।
क्या भारतीय नागरिकों को मदद मिलनी जारी रहेगी?
भारतीय दूतावास ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा है कि वे इटली में रहने वाले सभी भारतीय नागरिकों की हर संभव मदद के लिए हमेशा तैयार हैं। उन्होंने बताया कि दूतावास नियमित रूप से भारतीय समुदाय के संपर्क में रहता है और उनकी समस्याओं का समाधान करता है। विदेश मंत्रालय को टैग करते हुए जारी किए गए इस बयान में कहा गया कि मदद चाहने वाले किसी भी नागरिक का स्वागत है, बशर्ते वे स्थापित दिशा-निर्देशों और नियमों का पालन करें। दूतावास ने लोगों से अपील की है कि वे इस तरह के भ्रामक वीडियो पर भरोसा न करें।