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UK: ब्रिटेन में बाल यौन शोषण मामलों के लिए 'एशियाई' शब्द का इस्तेमाल, प्रवासी भारतीय संगठनों ने की पीएम निंदा

Tue, 07 Jan 2025 11:10 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन।

सार

UK: ब्रिटेन के प्रवासी भारतीय संगठनों ने बाल यौन शोषण के लिए जिम्मेदार गिरोहों के लिए एशियाई शब्द का इस्तेमाल करने पर कड़ी आपत्ति जताई है। सिख संगठनों के नेटवर्क ने कहा कि यह शब्दावली बहुत अस्पष्ट है और 2012 में उसने इस बारे में शिकायत की थी।
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कीर स्टार्मर - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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ब्रिटेन में भारतीय समुदाय के कई संगठनों ने इंग्लैंड के विभिन्न हिस्सों में बाल यौन शोषण से जुड़े मामलों में 'एशियाई' शब्द के इस्तेमाल पर कड़ी आपत्ति जताई। इन मामलों में जो गिरोह शामिल हैं, उनमें से ज्यादातर में आरोपी पाकिस्तानी मूल के पुरुष हैं। 

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पीएम स्टार्मर ने किया गिरोह के लिए 'एशियाई' शब्द का इस्तेमाल
प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोमवार को यह दावा किया था कि उन्होंने क्राउन प्रोसिक्यूशन सर्विस (सीपीएस) के प्रमुख (2008 से 2013 तक) के रूप में ऐसे मामलों की फिर से जांच करवाई और 'एशियाई ग्रूमिंग गिरोह' के खिलाफ पहली बार मुकदमा दायर किया था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सिख संगठनों के नेटवर्क (एनएसओ) ने कहा कि यह शब्दावली बहुत अस्पष्ट है और 2012 में उसने इस बारे में शिकायत की थी। 

स्टार्मर का बयान निराशाजनक: एनएसओ
एनएसओ ने कहा, प्रधानमंत्री का यह बयान निराशाजनक है, क्योंकि ज्यादातर अपराधियों की जाति और धर्म के बारे में खुलकर बात करने का डर था। इसका असर यह हुआ कि इससे पीड़ितों की स्थिति और अधिक खराब हो गई। इसके साथ ही उन्होंने मीडिया से अनुरोध किया कि वह इस मामले की रिपोर्ट सही और सटीक तरीके से करे। 
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वहीं, सिख फेडरेशन यूके और कुछ हिंदू संगठनों ने भी इस पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि राजनीति के लिए इन अपराधियों के लिए एशियाई शब्द इस्तेमाल किया जा रहा है। इस तरह की राजनीति पीड़ितों के लिए नुकसानदेह साबित हो रही है। 

कानून बनाने की दिशा में काम कर रही सरकार: यवेटे कूपर
ब्रिटेन की गृह मंत्री यवेटे कूपर ने सोमवार को संसद में घोषणा की कि उनकी सरकार बाल यौन शोषण के मामलों से निपटने के लिए सख्त कानून बनाने की दिशा में काम कर रही है। कूपर ने दस साल पुरानी रिपोर्ट्स का हवाला दिया, जिनमें 1400 बच्चों के साथ यौन शोषण, दुष्कर्म और तस्करी के मामले सामने आए थे। 

टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने इस मुद्दे पर ब्रिटेन सरकार की आलोचना की थी। जिसके बाद ब्रिटेन सरकार और विपक्षी दलों के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई। यह मामला तबसे तूल पकड़ रहा है। 

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