वो जगह, जहां से अहिंसात्मक विरोध को नई दिशा मिली। वो जगह, जहां से महात्मा गांधी ने अहिंसात्मक विरोध को अपना हथियार बनाया और आखिर में भारत देश को आजादी मिली। वो अब फिर से अपने पुराने शानदार स्वरूप में आने को तैयार है। दरअसल, अब टॉलस्टॉय फॉर्म को फिर से उसी तरह से बसाया जा रहा है, जैसे वो पहले था। जिस जगह रहकर महात्मा गांधी ने अहिंसात्मक विरोध को निर्णायक तौर पर अपनाया था।
दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग स्थित टॉलस्टॉय हॉउस जो उजाड़ हो चला था, उसके उद्धार के लिए कुछ भारतीय कंपनियां सामने आए हैं। इन कंपनियों ने इंडिया क्लब के साथ सहयोग से टॉल्सटॉय फार्म की बेजारी को दूर करने का प्रस्ताव किया है।
इस समय टॉल्सटॉय फार्म में महात्मा गांधी का निवास स्थान मकान और उस पर लगी पट्टिका तो बची है लेकिन अन्य ज्यादातर मकान और सुविधाएं जीर्ण-शीर्ण दशा में पहुंच गई हैं। फार्म की दशा में सुधार के लिए दक्षिण अफ्रीका में भारतीय महावाणिज्य दूत केजे श्रीनिवास बैठक में भारतीय लोगों ने कई तरह से मदद के प्रस्ताव रखे।
किर्लोस्कर समूह के अनिल सूर ने दस किलोवाट का जेनरेटर देने की घोषणा की जिससे फार्म की विद्युत व्यवस्था में मदद मिले। जबकि सीआरआइ पंप्स के शशि कुमार ने फार्म की जलापूर्ति व्यवस्था के लिए पंप देने की घोषणा की। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने क्षेत्र में कृषि विकास के लिए आवश्यक उपकरणों की सहायता देने की घोषणा की। यूनाइटेड कलर्स के देबजीत सोम ने इलाके की रंगाई-पुताई करवाने की जिम्मेदारी ली। सुधार कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा दिये एक करोड़ रुपये का भी इस्तेमाल किया जाएगा।
बता दें कि टॉल्सटॉय फार्म जोहानिसबर्ग से 30 किलोमीटर दूर स्थित है। इस स्थान को गांधीजी ने अंग्रेजों के भेदभाव के खिलाफ सत्याग्रह आंदोलन की जन्मस्थली और कर्मस्थली बनाया था। यहीं का आंदोलन बाद में भारत पहुंचा और उसे अंग्रेजी की दासता से मुक्ति दिलाई।