आतंकवाद के पनाहगाह पाकिस्तान को सख्त सबक सिखाने के लिए भारत में सीधी जंग से इतर गुप्त कार्रवाई (कोवर्ट ऑपरेशन) पर भी गंभीरता से विचार हो रहा है। इसका स्तर सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर स्ट्राइक से बड़ा और पाकिस्तान की कल्पना से परे होगा। इस बीच दुनियाभर में पाकिस्तान की निंदा हो रही है। उसकी ओर आ रहे बेतुके बयानों से यह नाराजगी और भी बढ़ गई है।
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद दुनियाभर में थू-थू हो रही है। आतंक के पनाहगार पाकिस्तान के खिलाफ पूरी दुनिया भारत के साथ खड़ी है। इस बीच भारतीय समुदाय के सदस्यों ने लंदन में पाकिस्तान उच्चायोग के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने पहलगाम आतंकवादी हमले की निंदा की और पाकिस्तान का नापाक चेहरा दुनिया के सामने बेनकाब किया। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने भी 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की। हमले में कम से कम 26 लोग मारे गए और कई अन्य घायल हो गए।
लंदन में भारतीय प्रवासी समुदाय के एक सदस्य ने कहा, 'हम भारतीयों का समर्थन करने के लिए यहां हैं। मैं भारतीय यहूदी हूं और यहां हमारे पास एक बड़ा यहूदी समुदाय है, जो हमेशा भारत का समर्थन करता है, क्योंकि हमारे दुश्मन एक ही हैं। इस्लामी कट्टरपंथ पूरी दुनिया में है। 7 अक्तूबर (2023) को इस्राइल को इसका सामना करना पड़ा और जब मैंने देखा कि यह भारत में हुआ, तो मुझे इसकी याद आ गई। आतंकवादी आए और निर्दोष लोगों को मार डाला, और इस आतंकवाद को पाकिस्तानी इस्लामी शासन द्वारा पोषित किया जाता है। हम यहां रहेंगे और हमेशा भारत का समर्थन करेंगे। पीएम मोदी बहुत अच्छा काम कर रहे हैं और मुझे उम्मीद है कि वे इस आतंकवाद को रोकने के लिए कुछ करेंगे। मैं 90 के दशक में बॉम्बे में एक बम विस्फोट में फंस गया था। मैं बच गया, लेकिन मैं व्यक्तिगत अनुभव से जानता हूं कि एक बम या आतंकवादी गतिविधि लोगों को कैसे प्रभावित कर सकती है। हम यहां हैं और हम हमेशा साथ रहेंगे।'
इस बीच सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की। सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने आतंकवाद के इस निंदनीय कृत्य के अपराधियों, आयोजकों, वित्तपोषकों और प्रायोजकों को जवाबदेह ठहराने और उन्हें न्याय के कटघरे में लाने की जरूरत पर जोर दिया। इन हत्याओं के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और सभी राज्यों से अंतरराष्ट्रीय कानून और प्रासंगिक सुरक्षा परिषद प्रस्तावों के तहत अपने दायित्वों के अनुसार इस संबंध में सभी संबंधित अधिकारियों के साथ सक्रिय रूप से सहयोग करने का आग्रह किया।