भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद एमी बेरा एक बार फिर एशिया-प्रशांत, मध्य एशिया और परमाणु अप्रसार पर कांग्रेस की एक महत्वपूर्ण उपसमिति के अध्यक्ष चुने गए हैं। प्रतिनिधि सभा में सबसे लंबे समय से भारतवंशी सांसद बेरा 117वीं कांग्रेस के लिए उक्त मामलों पर ‘हाउस फॉरेन अफेयर्स सबकमेटी’ के दोबारा अध्यक्ष चुने गए हैं।
55 वर्षीय सांसद एमी बेरा (55) ने कहा, इस उपलब्धि पर सम्मानित महसूस कर रहा हूं। अमेरिकी विदेश नीति के लिए एशिया महत्वपूर्ण क्षेत्र है, क्योंकि हमारी अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा इस क्षेत्र से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि संसद को कई चुनौतियों से निपटना होगा।
संसद की उपसमिति के सामने चीन के अधिनायकवाद वाले रुख, उत्तर कोरिया के उकसावे की कार्रवाई, लोकतंत्र का दमन और क्षेत्र में मानवाधिकारों का हनन जैसे मुद्दे हैं। बेरा ने कहा, मैं उपसमिति में अपने सहयोगियों के साथ काम करने के लिए उत्सुक हूं।
राष्ट्रपति बाइडन के प्रशासन को न सिर्फ दुनिया में अमेरिकी नेतृत्व बहाल करना होगा बल्कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में हमारे संबंधों को और प्रगाढ़ बनाना होगा। इस समिति में ब्रैड शर्मन, डीना टिटस, एंडी लेविन, क्रिस्सी होलहान, एंडी किम, गेरी कोनोली, टेड लियू, एबीगेल स्पानबर्गर और केथी मैनिंग शामिल हैं।
संयुक्त राष्ट्र के अमेरिकी मिशन में दो भारतवंशियों की नियुक्ति
बाइडन प्रशासन ने संयुक्त राष्ट्र के अमेरिकी मिशन में दो अहम राजनयिक पदों पर दो भारतीय अमेरिकी विशेषज्ञों सोहिनी चटर्जी तथा अदिति गोरूर को नियुक्त किया है। चटर्जी विश्व निकाय में अमेरिकी राजदूत की वरिष्ठ नीति सलाहकार होंगी जबकि गोरूर इस मिशन में नीति सलाहकार होंगी।
चटर्जी वैश्विक विकास, संघर्ष तथा सामूहिक अत्याचार विषय की विशेषज्ञ हैं और हाल तक वह कोलंबिया यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ इंटरनेशन ऐंड पब्लिक अफेयर्स में प्राध्यापक के पद पर थीं। इससे पहले उन्होंने अमेरिका की एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट के ब्यूरो ऑफ पॉलिसी, प्लानिंग ऐंड लर्निंग में काम किया था।
वे भारत-अमेरिका में सहयोग बढ़ाने की पक्षधर रही हैं। जबकि गोरूर संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा की विशेषज्ञ हैं। उनका प्राथमिक अध्ययन आम नागरिकों के खिलाफ हिंसा रोकना तथा उसके लिए प्रतिक्रिया देने पर केंद्रित है। वह भारत में इंडियन इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन सैटलमेंट से भी जुड़ी रह चुकी हैं।