अमेरिका में जन्मसिद्ध नागरिकता को लेकर राजनीति गर्माहट तेज हो चुकी है। राष्ट्रपति पद संभालने के साथ ही डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जन्मसिद्ध नागरिकता में बदलाव के लिए एक कार्यकारी आदेश जारी किया। इसको लेकर भारतीय-अमेरिकी सांसदों ने असंतुष्टि जताई और ट्रंप के इस आदेश का जमकर विरोध किया।
बता दें कि ट्रंप के आदेश के तहत जन्मसिद्ध नागरिकता को लेकर भविष्य में बिना दस्तावेज वाले अप्रवासियों के बच्चों को नागरिकता नहीं मिलेगी। यह आदेश उन माता-पिताओं के बच्चों पर भी लागू होगा जो कानूनी रूप से लेकिन अस्थायी रूप से अमेरिका में रह रहे हैं, जैसे विदेशी छात्र या फिर पर्यटक। सीधे शब्दों में कहे तो आदेश में ये कहा गया है कि 19 फरवरी, 2025 के बाद जिन बच्चों के माता-पिता अमेरिकी नागरिक या वैध स्थायी निवासी नहीं होंगे, उन्हें नागरिकता नहीं मिलेगी।
भारतीय-अमेरिकी सांसद ने जताई नाराजगी
ट्रंप के इस आदेश के बाद भारतीय-अंमेरिकी सांसदों ने इसका जमकर विरोध किया। वहीं इस मामले में भारतीय-अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने कहा कि इस आदेश से न केवल अवैध अप्रवासियों के बच्चों पर असर पड़ेगा, बल्कि उन लोगों पर भी प्रभाव होगा जो एच-1बी वीजा पर अमेरिका में वैध रूप से रह रहे हैं। साथ ही खन्ना ने कहा कि ट्रंप का आदेश जन्मजात नागरिकता को खत्म करता है न सिर्फ अवैध अप्रवासियों के बच्चों के लिए, बल्कि उन वैध अप्रवासियों के लिए भी जो अस्थायी रूप से अमेरिका में हैं।
गौरतलब है कि एच-1बी वीजा उन विदेशी कर्मचारियों को दिया जाता है जो तकनीकी या विशेष पेशेवर काम के लिए अमेरिका आते हैं और हर साल भारत जैसे देशों से बड़ी संख्या में लोग इसका लाभ उठाते हैं।
भारतीय सांसदों ने बताया असंवैधानिक
इस मामले में भारतीय-अमेरिकी सांसद श्री थानेदार ने कहा कि जन्मसिद्ध नागरिकता अमेरिका का कानून है और वह इसे हर हालत में बचाने के लिए संघर्ष करेंगे। वहीं प्रमिला जयपाल ने इसे असंवैधानिक बताते हुए कहा कि राष्ट्रपति इसे एक आदेश से बदल नहीं सकते। इसके साथ ही आव्रजन अधिकार समूहों ने इसे अदालत में चुनौती देने की बात की है, क्योंकि उनका कहना है कि यह आदेश असंवैधानिक है।
ट्रंप के फैसले को न्यू जर्सी के अटॉर्नी जनरल की चुनौती
वहीं इस मामले में 22 राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर किया है। इन राज्यों का कहना है कि 14वें संशोधन के तहत जन्मसिद्ध नागरिकता स्वचालित है और इसे बदलने का अधिकार न तो राष्ट्रपति के पास है न ही कांग्रेस के पास।
यह आदेश संविधान का उल्लंघन- अटॉर्नी जनरल
साथ ही मामले में न्यू जर्सी के अटॉर्नी जनरल मैथ्यू प्लैटकिन और कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोन्टा ने कहा कि यह आदेश संविधान का उल्लंघन है। डेमोक्रेटिक पार्टी के अजय भुटोरिया ने भी कहा कि यह आदेश असंवैधानिक है और यह अमेरिका के मूल मूल्यों को कमजोर करता है।
क्या है जन्मसिद्ध नागरिक कानून?
इससे पहले अमेरिकी धरती पर जन्मे किसी भी बच्चे के पास जन्म के साथ ही अमेरिकी नागरिकता का अधिकार होता था। यह अधिकार अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन कानून के तहत दिया जाता है। इसके उल्लंघन पर कार्यकारी आदेश को न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है। ट्रंप प्रशासन की तरफ से इस आदेश के 30 दिन बाद से अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को उनके माता-पिता के देश में रहने के कानूनी अधिकार से जोड़कर ही नागरिकता दी जाएगी।