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तैयारी: रूस की टेक्नोलॉजी से भारतीय कंपनियां बनाएगी वैक्सीन, तीन चरणों में होगा स्पुतनिक का उत्पादन

Sat, 22 May 2021 01:55 PM IST
प्रशांत कुमार वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला

सार

कोरोना की दूसरी लहर के दौरान वैक्सीन की कमी से भारत जूझ रहा है। इसी बीच रूस में भारतीय राजदूत ने यह कहकर राहत पहुंचाई है कि आने वाले समय में रूस की तकनीक इस्तेमाल कर भारतीय कंपनियां वैक्सीन बना सकती है। 
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स्पुतनिक-वी - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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पिछले दिनों भारत कोरोना वैक्सीन की कमी का सामना कर रहा था तो सबसे पहले रूस ने मदद का एलान किया। रूस की स्पुतनिक वैक्सीन भारत में पहुंचने भी लगी है। इसी महीने से कोरोना मरीजों को यह टीका लगाया भी जाएगा। इसी बीच रूस में रह रहे भारतीय राजदूत ने रूस की वैक्सीन प्लान के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि रूस भारत को मदद के लिए पूरी तरह से तैयार है।  रूस स्पुतनिक वैक्सीन का उत्पादन तीन चरणों में करने की तैयारी की है। 

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न्यूज एजेंसी एएनआई के हवाले रूस में भारतीय राजदूत डी बाला वेंकटेश वर्मा ने कहा कि रूस वैक्सीन उत्पादन करने में भारत को रॉ मटेरियल से लेकर तकनीक अदान-प्रदान तक मदद करेगा। वैक्सीन का तीन चरणों में प्रोडक्शन किया जाएगा। 




भारत पहुंचने लगी स्पुतनिक वैक्सीन
सबसे पहले, रूस ने वैक्सीन की आपूर्ति शुरू कर दी है। दूसरा, आरडीआईएफ थोक में भारत भेजेगा। जिसे इस्तेमाल के लिए स्टोर करना होगा। वहीं तीसरा और आखिरी रूस भारतीय कंपनियों को टेक्नोलॉजी देगा जिससे भारतीय कंपनियां इसे अपने लैब में भी तैयार कर सकती है। इन तीनों को मिलाकर करीब  850 मिलियन खुराकें तैयार होंगी। 
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भारतीय राजदूत डी बाला वेंकटेश वर्मा ने कहा कि रूस ने स्पुतनिक लाइट वैक्सीन लेने का भी प्रस्ताव दिया है, लेकिन इसकी मंजूरी नहीं मिली है। उम्मीद की जा रही है कि मंजूरी मिलने के बाद इसकी भी सप्लाई तेजी से शुरू हो जाएगी।  

अक्टूबर-दिसंबर में भारत पहुंचेगी रूस की अत्याधुनिक S-400 मिसाइल
वहीं भारत के रक्षा बेड़े में जल्द ही रूस की अत्याधुनिक S-400 मिसाइल प्रणाली शामिल होने वाली है।  S-400 की पहली खेप रूस से इस साल अक्टूबर-दिसंबर में भारत पहुंच जाएगी। भारतीय राजदूत डी बाला वेंकटेश वर्मा ने बताया कि इसकी तैयारी जोरों पर चल रही है। भारतीय टीम यहां पर मौजूद है। साल की आखिरी तिमाही में यहां से पहली खेप चली जाएगी। 

गौरतलब है कि भारत ने अक्टूबर 2018 में रूस के साथ पांच अरब डॉलर में S-400 वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली की पांच यूनिट लेने का करार किया था। भारत 2019 में 80 करोड़ डॉलर की पहली किस्त का भुगतान भी कर चुका है।
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