संयुक्त राष्ट्र में महिमा कुमारी मेवाड़ ने जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान के बयान का जवाब देते हुए उस पर गलत जानकारी फैलाने और आतंकवाद को बढ़ावा देने के आरोप लगाए। उन्होंने जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा बताया। वहीं, प्रिया सरोज ने संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों और मिशन पर तैनात विशेषज्ञों के आपराधिक आचरण के मामले में भारत की जीरो टॉलरेंस नीति स्पष्ट की।
न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में भारत की दो महिला सांसदों ने अलग-अलग मुद्दों पर देश का पक्ष रखा। महिमा कुमारी मेवाड़ ने जम्मू-कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के बयान का जवाब दिया, जबकि प्रिया सरोज ने संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों और मिशन पर तैनात विशेषज्ञों के आपराधिक आचरण और जवाबदेही का मुद्दा उठाया। भारत के संयुक्त राष्ट्र मिशन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर दोनों सांसदों के बयानों की जानकारी साझा की।
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महिमा कुमारी ने पाकिस्तान पर क्या आरोप लगाए?
संयुक्त राष्ट्र की चौथी समिति में उपनिवेशवाद से जुड़े मुद्दे पर पाकिस्तान के प्रतिनिधि के बयान के जवाब में महिमा कुमारी ने भारत का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र के मंच का इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर को लेकर झूठ और गलत जानकारी फैलाने के लिए कर रहा है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि पाकिस्तान को ऐसा करने से बचना चाहिए।
जम्मू-कश्मीर पर भारत ने क्या दोहराया?
महिमा कुमारी ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तानी सशस्त्र बलों और उनके सहयोगियों ने अपने बुनियादी अधिकारों, आजादी और जरूरी सुविधाओं की मांग कर रहे दर्जनों निर्दोष नागरिकों की हत्या की है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में सैन्य तानाशाही, चुनावों में धांधली, लोकप्रिय निर्वाचित नेताओं को जेल में डालने, धार्मिक कट्टरपंथ और सरकारी नीति के तौर पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का रिकॉर्ड रहा है। उन्होंने पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र के मंच पर उपदेश देने से बचने की सलाह दी। साथ ही, उन्होंने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और हमेशा रहेगा।
प्रिया सरोज ने संयुक्त राष्ट्र में कौन-सा मुद्दा उठाया?
प्रिया सरोज ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की छठी समिति में एजेंडा आइटम 75 पर भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य दिया। यह मुद्दा संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों और मिशन पर तैनात विशेषज्ञों की आपराधिक जवाबदेही से जुड़ा था। उन्होंने कहा कि भारत कर्मचारियों के आपराधिक आचरण और कदाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाता है। उन्होंने जवाबदेही तय करने के लिए संयुक्त राष्ट्र और सदस्य देशों के बीच मजबूत सहयोग तथा प्रभावी व्यवस्था बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया।
पीड़ितों और गवाहों की सुरक्षा पर क्या कहा?
प्रिया सरोज ने कहा कि जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया में उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन और पीड़ितों व गवाहों की सुरक्षा जरूरी है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता मजबूत करने, सदस्य देशों के साथ सहयोग बढ़ाने और जवाबदेही सुनिश्चित करने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।