ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक रूस में 10 और 11 जून को आयोजित हुई। बैठक का पहला दिन सोमवार को था। लोकसभा चुनावों के कारण आधिकारिक तौर पर इस वक्त भारत में कोई विदेश मंत्री नहीं था। हालांकि जयशंकर सोमवार शाम को ही विदेश मंत्री के रूप में नियुक्त किए गए। इस वजह से वे बैठक में शामिल होने रूस नहीं जा सके। इसलिए भारत का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ राजनयिक दम्मू रवि ने किया।
भारत ने किया इन देशों का स्वागत
इसके अलावा, भारत ने सोमवार को मिस्र, ईरान, यूएई, सऊदी अरब और इथियोपिया के ब्रिक्स में शामिल होने का स्वागत किया। उनके प्रतिनिधियों ने पहली बार रूस द्वारा आयोजित ब्रिक्स की महत्वपूर्ण बैठक में भाग लिया। कार्यक्रम पश्चिमी रूस के निजनी नोवगोरोड में आयोजित हुआ। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर सोमवार को एक पोस्ट किया। उन्होंने ब्रिक्स परिवार के नए सदस्यों का स्वागत किया।
आतंकवाद के मुद्दे पर विदेश मंत्रियों ने जताई चिंता
बैठक में विदेश मंत्रियों ने जी20 शिखर सम्मेलन की तारीफ की। उन्होंने जी20 में अफ्रीकी संघ को शामिल करने का स्वागत किया। मंत्रियों ने क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करने के लिए अफगानिस्तान में तत्काल शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने आतंकवाद के किसी भी कृत्य की कड़ी निंदा की।
ब्रिक्स में ये देश शामिल
बता दें कि ब्रिक्स में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, इथोपिया, ईरान, मिस्र और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। ब्रिक्स समूह के मूल सदस्यों में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका का संक्षिप्त रूप है।
विदेश मंत्रियों ने बिना शर्त बंधकों की रिहाई का आह्वान किया
बैठक के दौरान समूह ने गाजा पट्टी में फलस्तीन नागरिक आबादी को मानवीय सहायता की तत्काल, सुरक्षित और निर्बाध डिलीवरी का भी आह्वान किया। साथ ही युद्धविराम के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2728 के प्रभावी कार्यान्वयन पर भी दबाव डाला। विदेश मंत्रियों ने समान रूप से उन सभी बंधकों और नागरिकों की तत्काल और बिना शर्त रिहाई का आह्वान किया, जिन्हें अवैध रूप से बंदी बनाया गया है।