भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) को बताया है कि सीरिया संघर्ष में शामिल विदेशी और किराए के लड़ाकों ने अब दूसरे देशों की ओर रूख करना शुरू कर दिया है। भारत ने यूएनएससी को चेताते हुए कहा है कि लड़ाकों के दूसरे देशों में जाने से अब वहां की शांति और सुरक्षा खतरे में पड़ने की आशंका है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने बुधवार को सीरिया पर आयोजित ब्रीफिंग में परिषद को बताया कि कि भारत इस दिशा में सकारात्मक पहल को तैयार है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सीरिया की मदद, नए सीरिया के गठन, सुरक्षा और महामारी में जिंदगी से जूझ रहे लोगों की मदद की अपील की है।
उन्होंने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र और सीरिया की सरकार के फैसले के साथ मिलकर मानवता लिए काम करना चाहता है। सीरिया और समय की यही मांग है।
सीरिया के मसले पर हुई बैठक में तिरुमूर्ति ने याद दिलाते हुए कहा कि भारत की ही अध्यक्षता में अगस्त 2011 में सीरिया संघर्ष को लेकर पहली बार बयान जारी किया गया था। दिसंबर 2012 में सीरिया पर तीन प्रस्ताव भी स्वीकार किए गए थे। इन तीनों में से किसी को लागू करने में कोई खास काम नहीं हो सका है और नतीजा सबके सामने है। एजेंसी।
सीरिया समस्या हल होती नहीं दिख रही
तिरुमूर्ति ने कहा कि हम आठ साल बाद हम सुरक्षा परिषद में नई पारी की शुरुआत कर रहे हैं। हम देख रहे हैं कि सीरिया की समस्या दूर होती नहीं दिखाई दे रही है। यहां तक की अभी तो राजनीतिक प्रक्त्रिस्या भी शुरू नहीं हो पाई है।
इसका नतीजा ये है कि सीरिया में फला-फूला आतंकवाद अब दुनिया के नए स्थानों यहां तक की अफ्रीका तक में फैल रहा है। सीरिया के लड़ाके अब नए स्थानों पर अपना ठिकाना बना खुद को मजबूत बनाने में लगे हुए हैं।
सीरिया संघर्ष जल्द हल होने की उम्मीद
तिरुमूर्ति ने उम्मीद जताई की सीरिया संघर्ष का समाधान जल्द हल होगा। इसमें अब और अधिक देरी नहीं होगी और जल्द ही नए सीरिया के बनने की शुरुआत होगी। सांविधानिक समिति की बैठक पांचवीं बैठक 25 जनवरी को जेनेवा में आयोजित होनी है जहां सभी दलों से सहयोग की उम्मीद की जा रही है जिससे समस्या का निराकरण हो सके। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ब्रीफिंग में सीरिया के प्रतिनिधि गेर पेडेरसन भी मौजूद थे।