अमेरिका के एक थिंक टैंक ने कहा है कि कोरोना महामारी के चलते पाकिस्तान और श्रीलंका की चरमराती आर्थिक स्थिति का फायदा भारत और अमेरिका को उठाना चाहिए। दोनों देशों को साथ मिलकर उनके साथ संबंध मजबूत कर हिंद महासागर में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे चीन को रोकने के लिए कोई योजना बनानी चाहिए।
इसमें कहा गया है कि पाकिस्तान और श्रीलंका संभवत: नकारात्मक वृद्धि की दिशा में चले जाएंगे और उन्हें अंतरराष्ट्रीय कर्जदाताओं से कर्ज राहत की आवश्यकता होगी। इसके बिना, श्रीलंका के सामने बड़े कर्ज डिफॉल्ट की संभावना है। दोनों देशों के अपने हितकारी के रूप में चीन की ओर देखने की संभावना है जैसा कि उनके नेता कुछ समय से करते प्रतीत हो रहे हैं।
रिपोर्ट ‘कोलकाता से लेकर काबुल तक संकट: दक्षिण एशिया में कोविड-19 का प्रभाव’ के अनुसार चीन दक्षिण एशिया की कर्ज से दबी सरकारों पर अपने लाभ के लिए आदान-प्रदान के तहत दबाव बना सकता है।
हडसन इंस्टिट्यूट की इस सप्ताह जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि यह क्षेत्र में भारत की सुरक्षा और अमेरिका के प्रभाव की कीमत पर होगा। पाकिस्तान और श्रीलंका के साथ संबंध मजबूत कर हिंद महासागर में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे चीन को रोकने के लिए भारत और अमेरिका को कोई योजना बनानी चाहिए।
चीन अपनी महत्वाकांक्षी ‘बेल्ट एंड रोड’ योजना के लिए पाकिस्तान और श्रीलंका की मदद लेने में लगा है और उसकी इस बात के लिए आलोचना होती रही है कि वह आर्थिक रूप से कमजोर देशों को अपने फायदे के लिए कर्ज के जाल में फंसा रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 से उत्पन्न खतरे से क्षेत्र के मिलकर काम करने की भारत की पहल को पाकिस्तान तवज्जो नहीं दे रहा है और वह इस चुनौतीपूर्ण समय में भी कश्मीर का मुद्दा उठा रहा है।