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संयुक्त राष्ट्र में भारत का पाक पर निशाना, 'आतंक समर्थक देश के हमले से निपटने के लिए ‘पहले हमला’ जरूरी'

Fri, 26 Feb 2021 01:36 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, संयुक्त राष्ट्र

सार

  • संयुक्त राष्ट्र में भारत ने कहा- 'आत्मरक्षा किसी भी देश का प्राथमिक अधिकार।
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सीमा पुजानी (फाइल फोटो) - फोटो : twitter.com/SeemaPujani
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विस्तार
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भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में एक बार फिर पाकिस्तान का नाम लिए बिना उसे आतंकवाद का समर्थक देश बताया है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र की एक बैठक में कहा कि कोई देश किसी अन्य आतंकी समर्थक देश के सशस्त्र हमले को नाकाम करने के लिए ‘पहले ही हमला’ करने के लिए बाध्य हो सकता है। भारत ने कहा, आत्मरक्षा एक राष्ट्र का प्राथमिक अधिकार है।

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संयुक्त राष्ट्र के लिए भारत के उप स्थायी प्रतिनिधि के नागराज नायडू ने मेक्सिको द्वारा आयोजित ‘अरिया फॉर्मूला’ बैठक में यह बात कही। उन्होंने कहा, सीमा पार आतंकियों को पनाह देने वाला देश 26/11 का मुंबई आतंकी हमला भी कर चुका है। इसलिए आत्मरक्षा के लिए उस देश को तत्काल और समानुपातिक आवश्यक रूप से कार्रवाई करनी चाहिए।

नागराज ने कहा, 1974 की संयुक्त राष्ट्र महासभा घोषणा के लिए जरूरी है कि एक सदस्य देश अपने नियंत्रण वाले क्षेत्र को दूसरे देश के खिलाफ आतंकवाद की अनुमति न दे। भारत ने इसी के साथ पुलवामा समेत कई आतंकी हमलों का जिक्र भी किया जो पड़ोसी देश की जमीन से किए गए। भारत का साफ इशारा पाकिस्तान की तरफ था। उन्होंने कहा, कई देशों का मानना है कि यदि आतंक समर्थक देश लगातार हमले करते हैं तो उनके खिलाफ बल का उपयोग किया जा सकता है।
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आतंकियों को पनाह दे रहा एक पड़ोसी देश
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बोलते हुए भारत के उप स्थायी प्रतिनिधि नागराज नायडू ने कहा, एक पड़ोसी देश न सिर्फ भारत में बल्कि दुनियाभर में आतंकियों को पनाह और मदद मुहैया करा रहा है। उन्होंने कहा, आतंकवाद को पड़ोसी देश की सरकार का भी समर्थन हासिल है और भारत कई दशकों से छद्म युद्ध और सीमापार आतंकवाद का सामना कर रहा है। वहां की सरकार खुलेआम आतंक का समर्थन करती है। इन आतंकियों को प्रशिक्षण, फंडिंग, खुफिया जानकारी और हथियार तक दिए जाते हैं, ताकि वे हमारे देश में हिंसा फैलाएं। इसलिए हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ाई लड़ें।

अहम समय पर भारत का बयान
यूएनएससी में भारत का बयान ऐसे समय पर आया है जब फ्रांस के पेरिस में वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) की बैठक चल रही है। इसमें पाकिस्तान के ग्रे लिस्ट में बने रहने या काली सूची में जाने को लेकर फैसला आना है। इससे पहले भारत ने परिषद में पाक के खिलाफ सबूत देकर साबित कर दिया था कि आतंकवाद एक गंभीर समस्या है जिसे रोकने के लिए पाक सरकार ने कोई कड़ी कार्रवाई नहीं कर रही है।

मानवाधिकार पर बोलने से पहले अपने गिरेबान में झांकें पाक-तुर्की
भारत ने अपने खिलाफ दुष्प्रचार में लगे पाकिस्तान और तुर्की को आड़े हाथों लेकर फटकार लगाई। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के 46वें विशेष सत्र में भारत ने जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए पाक प्रतिनिधि के बयान पर सख्त एतराज जताया।

जेनेवा में स्थायी मिशन की द्वितीय सचिव सीमा पुजानी ने कहा, पाकिस्तान द्वारा भारत के खिलाफ वैश्विक मंचों का दुरुपयोग नई बात नहीं है। उन्होंने कहा, मानवाधिकारों पर पाक रिकॉर्ड काफी खराब है ऐसे में उसे भारत पर अंगुली उठाने से पहले अपना घर ठीक करना चाहिए। पाक में अल्पसंख्यक, हिंदू, ईसाई समुदायों से भेदभाव या हिंसा आम घटनाएं हैं। उन्होंने तुर्की को भी फटकारते हुए कहा, वह इस्लामी सम्मेलन संगठन के बयान को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहा है। उन्होंने कहा तुर्की पहले अपने आप में सुधार लाए फिर दूसरों को देखे।

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