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संयुक्त राष्ट्र: क्यूबा पर अमेरिकी प्रतिबंधों के खिलाफ भारत का मतदान, प्रस्ताव को मिला कितने देशों का समर्थन?

Thu, 29 Oct 2026 10:47 AM IST
देवेश त्रिपाठी पीटीआई, न्यूयॉर्क

सार

भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में क्यूबा पर अमेरिकी आर्थिक, वाणिज्यिक और वित्तीय प्रतिबंध हटाने के प्रस्ताव का समर्थन किया। 193 सदस्यीय महासभा में प्रस्ताव के पक्ष में 130 वोट पड़े, जबकि 17 देशों ने विरोध किया और 25 मतदान से दूर रहे। भारत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति से होना चाहिए।
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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भारत ने क्यूबा पर अमेरिका की ओर से लगाए गए आर्थिक, वाणिज्यिक और वित्तीय प्रतिबंधों को समाप्त करने की मांग वाले संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया है। भारत ने कहा कि इन प्रतिबंधों को जल्द हटाया जाना चाहिए, ताकि क्यूबा के लोगों को अंतरराष्ट्रीय सहयोग में अधिक भागीदारी का अवसर मिले और देश की विकास संबंधी जरूरतें पूरी हो सकें।
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193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा ने बुधवार को इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। प्रस्ताव के पक्ष में 130 देशों ने मतदान किया, जबकि 17 देशों ने विरोध किया। वहीं, 25 देश मतदान से अनुपस्थित रहे यानी उन्होंने किसी पक्ष में वोट नहीं दिया।

भारत ने अंतरराष्ट्रीय कानून का दिया हवाला
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की काउंसलर सौम्या नायर ने भारत की ओर से बयान देते हुए कहा कि महासभा बार-बार क्यूबा पर लगे प्रतिबंधों को समाप्त करने की मांग कर चुकी है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने ऐसे कानूनों और नियमों को भी खारिज किया है, जिनका प्रभाव दूसरे देशों की सीमाओं से बाहर तक पड़ता है और जो उनकी संप्रभुता, विकास तथा समृद्धि को नुकसान पहुंचाते हैं।
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नायर ने कहा, "भारत महासभा की उस अपील को दोहराता है, जिसमें सभी देशों से ऐसे कानूनों और उपायों को लागू करने से बचने और उन्हें वापस लेने तथा अमान्य करने का आग्रह किया गया है। यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उनकी जिम्मेदारियों के अनुरूप होना चाहिए।"

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संवाद और कूटनीति पर जोर
भारत ने कहा कि बहुपक्षवाद के प्रति उसकी प्रतिबद्धता इस विश्वास पर आधारित है कि अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए किया जाना चाहिए। यह प्रक्रिया संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुरूप होनी चाहिए।

नायर ने उम्मीद जताई कि क्यूबा पर लगे प्रतिबंध जल्द हटाए जाएंगे। इससे ऐसा माहौल बनाने में मदद मिलेगी, जिसमें क्यूबा के लोग अंतरराष्ट्रीय सहयोग में अधिक भागीदारी कर सकेंगे और अपनी वैध विकास संबंधी आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।

क्यूबा की स्वास्थ्य और खाद्य व्यवस्था पर असर
भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि प्रतिबंधों का क्यूबा की अर्थव्यवस्था और जरूरी सेवाओं पर असर पड़ा है। नायर के मुताबिक, क्यूबा की स्वास्थ्य व्यवस्था में आवश्यक दवाओं की 60 प्रतिशत से अधिक की कमी है। पिछले पांच वर्षों में देश का खाद्य उत्पादन भी 50 प्रतिशत से ज्यादा घटा है।
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उन्होंने कहा कि क्यूबा को ईंधन के निर्यात पर लगी पाबंदियों ने देश के ऊर्जा संकट को और गंभीर बना दिया है। ईंधन की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, जल आपूर्ति, खाद्य वितरण और परिवहन जैसी जरूरी सेवाएं प्रभावित हुई हैं।
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