भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएएससी) में ईरान के खिलाफ लाए गए एक कड़े प्रस्ताव का सह-प्रायोजन किया है। इस प्रस्ताव में खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के देशों और जॉर्डन पर ईरान के भयानक हमलों की निंदा की गई है। भारत उन 135 देशों में शामिल है जिन्होंने इस प्रस्ताव को सह-प्रायोजन किया है।
सुरक्षा परिषद के 15 सदस्यों में से 13 देशों ने इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया। किसी भी देश ने इसके विरोध में वोट नहीं किया। हालांकि, रूस और चीन ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया और वे इससे दूर रहे। इस समय अमेरिका सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता कर रहा है। इस प्रस्ताव में बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन की क्षेत्रीय अखंडता और आजादी का समर्थन किया गया है। संयुक्त राष्ट्र ने मांग की है कि ईरान इन देशों पर अपने सभी हमले तुरंत और बिना शर्त रोक दे। साथ ही, ईरान को चेतावनी दी गई है कि वह स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों को बंद करने या बाधित करने की धमकी देना बंद करे।
प्रस्ताव में कहा गया है कि ईरान के ये हमले अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं और इनसे वैश्विक शांति को गंभीर खतरा है। इसमें इस बात पर भी चिंता जताई गई कि हमलों में रिहायशी इलाकों और आम नागरिकों को निशाना बनाया गया, जिससे जान-माल का काफी नुकसान हुआ है।
ये भी पढ़ें: Iran War: अमेरिका सांसदों ईरान मे लड़कियों के स्कूल पर हमले का किया विरोध, 7 से 12 साल की बच्चियों की हुई मौत
अमेरिका के प्रतिनिधि माइक वाल्ट्ज ने कहा कि यह प्रस्ताव ईरान के शासन की क्रूरता के खिलाफ दुनिया का एक स्पष्ट संदेश है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शांति के लिए हर संभव कोशिश की, लेकिन ईरान ने बार-बार 'रेड लाइन' पार की। अब पूरी दुनिया ईरान को उसकी हरकतों के लिए जिम्मेदार ठहरा रही है।
दूसरी तरफ, ईरान ने इस कार्रवाई को अन्यायपूर्ण और अवैध बताया है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने कहा कि यह फैसला संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका और इस्रायल के हमलों में हजारों ईरानी नागरिक मारे गए हैं और हजारों इमारतें तबाह हो गई हैं। ईरान ने दावा किया कि उसने कभी समुद्री रास्ता बंद नहीं किया और वह अपने पड़ोसियों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
भारत के साथ ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान, पाकिस्तान और सऊदी अरब जैसे कई देशों ने इस प्रस्ताव का साथ दिया है। यह प्रस्ताव ईरान को अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का पालन करने और युद्ध के दौरान आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की याद दिलाता है।
अन्य वीडियो-