फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूएन में भारत की दो-टूक: पाकिस्तान को राजदूत मैथिली ने दिखाया आईना, कहा- वहां सेना ही शासन, सेना ही कानून

Mon, 12 Oct 2026 12:09 AM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र

सार

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान को घेरते हुए कहा कि वहां सेना ही हुकूमत और कानून है। भारत ने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की जेल, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों को लेकर भी सवाल उठाए। पाकिस्तान पर अल्पसंख्यकों के अधिकारों और प्रेस की आजादी के मुद्दे पर भी पलटवार किया। इसके अलावा, भारत ने सैन्य अभियान ऑपरेशन सिंदूर का बचाव भी किया। भारत ने यूएन में क्या-क्या कहा?
विज्ञापन
यूएन में भारतीय राजदूत मैथिली और पाकिस्तानी राजनयिक बिलाल अहमद - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारत ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में कानून के शासन के मुद्दे पर पाकिस्तान को घेरा है। भारत ने कहा कि पाकिस्तान दूसरे देशों को कानून के शासन पर उपदेश नहीं दे सकता। उसके अपने देश में तो 'सेना ही हुकूमत है और सेना ही कानून है'।
विज्ञापन


शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा की छठी समिति में कानून के शासन पर चर्चा हुई। यह चर्चा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानून के शासन के विषय पर थी। इसी दौरान पाकिस्तान ने कुछ टिप्पणियां कीं। इसके जवाब में भारत ने शुक्रवार को जवाब देने के अपने अधिकार यानी 'राइट ऑफ रिप्लाई' का इस्तेमाल किया।

कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर पाकिस्तान घेरा
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की काउंसलर आर मैथिली ने कहा, यह विडंबना है कि ऐसा देश कानून के शासन पर उपदेश दे रहा है, जिसका अपना रिकॉर्ड इस व्यवस्था का मजाक बनाता है। उन्होंने कहा, पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र में कानून के शासन की रक्षा करने का दावा करता है। लेकिन अपने देश में सेना ही प्रभावी रूप से तय करती है कि कानून कैसे लागू होगा।
विज्ञापन


उन्होंने कहा,जो देश अपने सैन्य शासकों को अपनी ही अदालतों के दायरे से बाहर रखता है, उसे इस समिति में कानून के शासन पर उपदेश देने का कोई अधिकार नहीं है। 
 

मैथिली ने पाकिस्तान के 26वें संविधान संशोधन को न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए एक बड़ा झटका बताया। पाकिस्तान के 26वें संविधान संशोधन से उसकी न्यायिक व्यवस्था की संरचना और कामकाज में बड़े संस्थागत बदलावों का रास्ता खुला। इस संशोधन को कानून के शासन और मानवाधिकारों की सुरक्षा के खिलाफ माना जाता है।

ये भी पढ़ें: सूडान-मिस्र सीमा पर सोने की खदान पर हवाई हमला: 13 खनिकों की मौत, 28 घायल; निशाने पर कौन था?

इमरान खान की जेल पर क्या कहा?
मैथिली ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को जेल में रखने के मुद्दे पर भी पाकिस्तान की आलोचना की। उन्होंने कहा, पाकिस्तान में किसी भी सरकार को अपना निर्वाचित कार्यकाल पूरा नहीं करने दिया गया। एक पूर्व प्रधानमंत्री को मनमाने तरीके से जेल में रखा गया है। उसे चिकित्सा उपचार से भी वंचित किया जा रहा है। ऐसा उसकी अपनी सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के विपरीत किया जा रहा है। मैथिली ने कहा, यह सब कानून के शासन का मजाक उड़ाता है।

उन्होंने पाकिस्तान पर एक लोकप्रिय राजनीतिक पार्टी को चुनाव लड़ने से रोकने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वहां सैन्य अदालतों के जरिये आम नागरिकों को सजा दी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के जजों की आवाज दबाई जा रही है। मानवाधिकारों को कुचला जा रहा है। मैथिली ने कहा, मैं अपने पाकिस्तानी सहयोगी से सिर्फ एक बात कहना चाहती हूं। अपने लोगों की सुनिए। 

अल्पसंख्यकों और प्रेस की आजादी पर क्यों घेरा?
इसके बाद मैथिली ने पाकिस्तान के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा, पाकिस्तान अपने यहां अल्पसंख्यकों के अधिकारों और प्रेस की आजादी के रिकॉर्ड से ध्यान हटाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा, भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार को लेकर पाकिस्तान के आरोप केवल ध्यान भटकाने की एक रणनीति हैं। उन्होंने कहा, पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ उसके अपने व्यवहार पर सवाल उठते हैं। देश के अस्तित्व में आने के बाद से ही वहां की आबादी में अल्पसंख्यकों का प्रतिशत लगातार घटता रहा है।

मैथिली ने विदेशी मीडिया के लिए पाकिस्तान के नए दिशानिर्देशों का भी जिक्र किया। इन नियमों के तहत इस्लामाबाद, लाहौर और कराची के बाहर किसी भी काम के लिए 'अनापत्ति प्रमाणपत्र' यानी एनओसी लेना जरूरी है। उन्होंने सवाल किया, ऐसे देश में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की स्थिति आखिर क्या हो सकती है?

उन्होंने कहा, सत्ता में बैठे लोगों की जिम्मेदारी है कि वे जिन लोगों पर शासन करते हैं, उनके प्रति कानून के शासन के तहत अपने दायित्व निभाएं। लेकिन पाकिस्तान ने बार-बार इस वादे को तोड़ा है। मैथिली ने कहा, भारत पाकिस्तान को लेकर जरूरत से ज्यादा ध्यान नहीं देता। बल्कि इसका उलट है। पाकिस्तान ही भारत को लेकर जरूरत से ज्यादा ध्यान देता है।

ऑपरेशन सिंदूर को बताया उचित जवाब
उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' का भी बचाव किया। भारत ने मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में यह सैन्य अभियान शुरू किया था। इसके तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था। मैथिली ने इसे आतंकी हमले के जवाब में की गई एक नपी-तुली, उचित अनुपात वाली और खास ठिकानों पर केंद्रित कार्रवाई बताया। उन्होंने कहा,जहां तक इसके नतीजों की बात है, अगर बमबारी से क्षतिग्रस्त हवाई अड्डे और तबाह हैंगर ही जीत हैं, तो वे इसका जश्न मनाने के लिए स्वतंत्र हैं।
विज्ञापन


मैथिली ने कहा, भारत के खिलाफ झूठे आरोपों की लंबी सूची बार-बार पढ़ने से पाकिस्तान के प्रतिनिधियों को अपने लोगों से किए गए वादों से मुक्ति नहीं मिल जाएगी। पाकिस्तान के प्रतिनिधियों का इन वादों को पूरा करने का कोई इरादा ही नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें