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भारत ने आईजीएन की भूमिका पर उठाए सवाल, कहा- 'अपंग बन गई सुरक्षा परिषद नहीं ले रही फैसले'

Wed, 18 Nov 2020 01:09 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, न्यूयॉर्क।
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (फाइल फोटो) - फोटो : un.org
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भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 75वें सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि आज संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) खराब अंग (अपंग) की तरह बनकर रह गई है। ऐसा इसलिए क्योंकि वह अपनी प्रतिनिधि करने की क्षमता के अभाव में विश्वसनीय फैसले नहीं ले पा रही है। भारत ने इस दौरान सरकारों में आपसी बातचीत के लिए बने संगठन आईजीएन (अंतर-सरकार वार्ता समूह) की भूमिका पर भी सवाल उठाए।

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महासभा में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि आईजीएन सिर्फ खाली विश्वविद्यालयों में होने वाली बहस के लिए प्लेटफॉर्म बनकर रह गया है। यहां पर यूएन के सदस्य देशों के बीच में नतीजों की कोशिशें नहीं के बराबर रह गई हैं। तिरुमूर्ति ने कहा कि आईजीएन में पिछले एक दशक से सुधार पर जोशीले भाषण सुनने के अलावा कुछ भी नहीं हुआ है। क्योंकि इसके पास कार्यवाही के कोई नियम या रिकॉर्ड तक नहीं हैं।


हम अपने नोट्स तक खुद रखने को मजबूर हैं जो छोटे व मध्यम देशों पर बोझ डालते हैं। जो देश इन देशों के लिए मगरमच्छ के आंसू बहाते हैं, वे उन्हें सामान्य शिष्टाचार तक का हक भी नहीं देते, ताकि उनकी अपनी बहसों का आधिकारिक रिकॉर्ड रखा जा सके। यहां पर जो भी होता है, उसका कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाता और अगले साल फिर हम ऐसे शुरू करते हैं, जैसे कि कुछ हुआ ही नहीं है। 
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पाक को जवाब देना समय की बर्बादी
भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान की भारत पर की गई हालिया टिप्पणी पर कोई भी बात करने तक से इनकार कर दिया। तिरुमूर्ति ने कहा कि जब भी भारत का जिक्र किया जाता है, मैं पाकिस्तान के प्रतिनिधि द्वारा की गई अप्रासंगित और गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियों का जवाब देकर इस मंच का समय बर्बाद करना नहीं चाहता हूं। यह गंभीर बहस का मंच है न कि फालतू के आरोपों पर जवाब देने का।

चीन पर भी जताई नाराजगी 
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में चीन नाराजगी जताते हुए कहा कि बीजिंग को हर बात में अड़ंगा लगाने की अपनी आदतों से बाज आना चाहिए। दरअसल, भारत आईजीएन की भूमिका को कम करने की चीनी कोशिशों से नाराज है। इसका सबसे बड़ा कारण किसी भी तरह के सकारात्मक बदलाव पर चीन द्वारा वीटो कर देना है।

बता दें कि रूस, अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन यूएनएससी में भारत को शामिल करना चाहते हैं लेकिन चीन इसे वीटो कर देता है। चीन का नाम लिए बिना भारत ने कहा, गरीब देशों की मदद न कर पाने के लिए घड़ियाली आंसू रोने वाले कुछ बड़े देश अपनी सच्चाई उजागर कर चुके हैं।

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