शांति स्थापना आयोग में 31 सदस्य देश हैं, जिनमें संयुक्त राष्ट्र महासभा, सुरक्षा परिषद और आर्थिक और सामाजिक परिषद के सदस्य देश शामिल हैं। शीर्ष वित्तीय योगदानकर्ता देश और शीर्ष सैन्य योगदानकर्ता देश भी इसके सदस्य हो सकते हैं।
भारत को संयुक्त राष्ट्र के शांति स्थापना मिशन में फिर से निर्वाचित किया गया है। भारत का यह निर्वाचन 2025-26 की समयावधि के लिए हुआ है। दरअसल भारत का मौजूदा कार्यकाल 31 दिसंबर को समाप्त हो रहा है। भारत के निर्वाचन पर संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा कि 'एक संस्थापक सदस्य और यूएन शांति स्थापना मिशन में प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में, भारत वैश्विक शांति और स्थिरता की दिशा में काम करने के लिए शांति स्थापना मिशन के साथ अपने जुड़ाव को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है।'
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दुनिया में शांति स्थापित करने के लिए काम करता है ये आयोग
उल्लेखनीय है कि शांति स्थापना आयोग एक अंतर-सरकारी सलाहकार निकाय है, जो संघर्ष प्रभावित देशों में शांति प्रयासों का समर्थन करता है। शांति स्थापना आयोग में 31 सदस्य देश हैं, जिनमें संयुक्त राष्ट्र महासभा, सुरक्षा परिषद और आर्थिक और सामाजिक परिषद के सदस्य देश शामिल हैं। शीर्ष वित्तीय योगदानकर्ता देश और शीर्ष सैन्य योगदानकर्ता देश भी इसके सदस्य हो सकते हैं। शांति स्थापना आयोग संसाधनों को संगठित करने और सभी हितधारकों को साथ लाने में अहम भूमिका निभाता है ताकि संघर्ष को समाप्त कराया जा सके। साथ ही संघर्ष के बाद पुनर्निर्माण, संस्था निर्माण के काम भी सहयोग करता है।
भारत शांति मिशन में सबसे बड़ा सैन्य योगदानकर्ता
भारत संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना में सबसे बड़ा सैन्य योगदानकर्ता है। वर्तमान में भारत के छह हजार के करीब सैनिक संयुक्त राष्ट्र मिशन के तहत दुनिया के विभिन्न देशों में तैनात हैं, जिनमें अबेई, मध्य अफ्रीकी गणराज्य, साइप्रस, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, लेबनान, मध्य पूर्व, सोमालिया, दक्षिण सूडान और पश्चिमी सहारा आदि शामिल हैं। अब तक करीब 180 भारतीय शांति सैनिकों ने ड्यूटी के दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया है। यह किसी भी सदस्य देश के सैनिकों में सबसे ज्यादा है।