भारत सामाजिक बदलाव के मामले में दुनिया के प्रमुख देशों में काफी पीछे छूटा हुआ है। विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) द्वारा तैयार सामाजिक बदलाव सूचकांक में भारत 82 देशों में से 76वें नंबर पर रहा।
रैंकिंग के लिए देशों को पांच कसौटियां पर परखा गया है, जिसके दस आधार स्तंभ हैं। ये श्रेणियां स्वास्थ्य, शिक्षा (पहुंच, गुणवत्ता एवं समानता), प्रौद्योगिकी, कामकाज (अवसर, वेतन, काम करने की स्थिति) और संरक्षण एवं संस्थान (सामाजिक संरक्षण तथा समावेशी संस्थान) हैं। यह दर्शाता है कि उचित वेतन, सामाजिक सुरक्षा और आजीवन शिक्षा का सामाजिक बदलाव में सबसे बड़ा योगदान है।
आजीवन शिक्षा के मामले में भारत 41वें और कामकाज की परिस्थिति के स्तर पर वह 53वें पायदान पर है। भारत को जिन क्षेत्र में बहुत सुधार करने की जरूरत है, उनमें सामाजिक सुरक्षा (76वें) और उचित वेतन वितरण (79वें) शामिल हैं।
इस सूची में नॉर्डियक देश शीर्ष पांच स्थानों पर काबिज हैं। पहले पायदान पर डेनमार्क (85 अंक) है। इसके बाद नॉर्वे, फिनलैंड, स्वीडन और आइसलैंड है। शीर्ष दस देशों की सूची में नीदरलैंड (6वें), स्विट्जरलैंड (7वें), ऑस्ट्रिया (8वें), बेल्जियम (9वें) और लक्जमबर्ग (10वें) पायदान स्थान पर रहे।