संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि 1993 में मुंबई में हुए बम धमाकों के जिम्मेदारों को पाकिस्तान की सरकार ने न केवल संरक्षण दिया, बल्कि उन्हें पांच सितारा होटल में रुकवाया गया। वहां उनका आतिथ्य किया गया। यह वही पाकिस्तान है, जिस पर आरोप है कि उसने डी-कंपनी के दाऊद इब्राहिम को छिपा कर रखा है।
तिरुमूर्ति ने कहा कि यह समझना महत्वपूर्ण है कि लोकतंत्र में, दक्षिणपंथी और वामपंथी राजनीति का हिस्सा हैं, क्योंकि वे मतदान के माध्यम से सत्ता में आते हैं, जो लोगों की बहुमत की इच्छा को दर्शाता है और चूंकि लोकतंत्र में परिभाषा के अनुसार विचारधाराओं और विश्वासों का व्यापक स्पेक्ट्रम होता है। इसलिए हमें विभिन्न प्रकार के वर्गीकरण करने से सावधान रहने की आवश्यकता है, जो स्वयं लोकतंत्र की अवधारणा के विरुद्ध हो सकते हैं। तथाकथित खतरों को भी ऐसे वर्गीकरण दिए जा रहे हैं जो कुछ राष्ट्रीय या क्षेत्रीय संदर्भों तक सीमित हैं। इस तरह के राष्ट्रीय या क्षेत्रीय आख्यानों को एक वैश्विक आख्यान में शामिल करना भ्रामक और गलत है। उन्होंने कहा कि इस तरह के रुझान न तो वैश्विक हैं और न ही इसकी कोई सहमत वैश्विक परिभाषा है।
लश्कर, जैश आतंकी गुटों से संपर्क मजबूत कर रहा अलकायदा : भारत
तिरुमूर्ति ने इस बात पर भी जोर दिया कि हाल ही में, आतंकवादी गतिविधियों का पुनरुत्थान उनकी सीमा और विविधता के साथ-साथ भौगोलिक स्थान दोनों में देखा गया है। अगस्त 2021 में भारत की अध्यक्षता में अपनाए गए अफगानिस्तान पर सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव को याद करते हुए उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि अल-कायदा और तालिबान से हमदर्दी रखने वाले अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) को अपना समर्थन बंद कर दें।
तिरुमूर्ति ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) द्वारा प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे पाकिस्तान के आतंकवादी संगठनों के साथ अलकायदा के संपर्क लगातार मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अफगानिस्तान के हालिया घटनाक्रम से आतंकी समूहों को दोबारा ऊर्जा मिली है।
तिरुमूर्ति ने आगे कहा कि इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) ने अपनी रणनीति को बदल दिया है, जिसका ध्यान अब सीरिया और इराक में पैर जमाने पर है और इसके क्षेत्रीय सहयोगी अपने विस्तार को मजबूत कर रहे हैं, खासकर अफ्रीका और एशिया में। तिरुमूर्ति ने कहा कि 2001 में 9/11 का आतंकवादी हमला 'आतंकवाद के प्रति हमारे दृष्टिकोण को लेकर एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ है।'
उन्होंने कहा, इसी तरह अलकायदा बड़ा खतरा बना हुआ है तथा अफगानिस्तान के हालिया घटनाक्रम ने उन्हें फिर से मजबूत होने का मौका ही दिया है। लश्कर और जैश के साथ उसके संपर्क लगातार मजबूत हो रहे हैं।