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'भारत का प्रस्ताव सबसे व्यापक': यूक्रेनी विदेश मंत्री सिबिहा ने की तारीफ, खत्म होने वाला है रूस के साथ युद्ध?

Sat, 03 Oct 2026 08:20 PM IST
राकेश कुमार एएनआई, कीव।

सार

यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा ने भारत के शांति प्रस्ताव को चार अंतरराष्ट्रीय प्रस्तावों में सबसे व्यापक बताया है। यूक्रेन तुर्किये, मिस्र और अमेरिका के प्रस्तावों पर भी विचार कर रहा है, जिनमें कृषि आपूर्ति और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े संघर्षविराम शामिल हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों और शांतिपूर्ण समाधान के विचारों की सराहना की है। भारत ने दोनों देशों के साथ अपने संबंधों के आधार पर युद्ध खत्म कराने और स्थायी शांति स्थापित करने के प्रयासों का समर्थन किया है।
 
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आंद्रेई सिबिहा, विदेश मंत्री, यूक्रेन - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा ने रूस के साथ युद्ध खत्म कराने के लिए भारत के प्रस्ताव को चार अंतरराष्ट्रीय प्रस्तावों में सबसे व्यापक बताया है। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, सिबिहा ने यह बात एक संवाददाता सम्मेलन में कही। उन्होंने बताया कि यूक्रेन के सामने भारत, तुर्किये, मिस्र और अमेरिका के प्रस्ताव हैं, जिन पर विचार किया जा रहा है। सिबिहा ने कहा कि भारत ने पहली बार इस संघर्ष को खत्म कराने में सक्रिय भूमिका निभाने की इच्छा जताई है।
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किन-किन देशों ने दिए हैं संघर्षविराम के प्रस्ताव?
यूक्रेन के सामने भारत के अलावा तुर्किये, मिस्र और अमेरिका के प्रस्ताव हैं। इन देशों का जोर युद्ध के अलग-अलग पहलुओं पर है। तुर्किये और मिस्र ने काला सागर में अनाज और कृषि उत्पादों की आपूर्ति से जुड़ा संघर्षविराम प्रस्तावित किया है। वहीं, अमेरिका ने ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े संघर्षविराम का प्रस्ताव पेश किया है। यूक्रेन इन प्रस्तावों पर विचार कर रहा है और उसने ऊर्जा तथा कृषि आपूर्ति से जुड़े संघर्षविराम को स्वीकार करने की संभावना से इनकार नहीं किया है।

तुर्किये और मिस्र के प्रस्ताव में क्या है खास?
तुर्किये और मिस्र का संयुक्त प्रस्ताव काला सागर में अनाज और कृषि उत्पादों की आपूर्ति जारी रखने से जुड़ा है। मिस्र के लिए यह मुद्दा खास महत्व रखता है, क्योंकि उसकी अनाज की करीब एक-तिहाई आपूर्ति यूक्रेन से होती है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य काला सागर में कृषि आपूर्ति से जुड़े संघर्ष को सीमित करने की दिशा में रास्ता निकालना है। हालांकि, मूल खबर में इस प्रस्ताव के लागू होने या दोनों पक्षों की ओर से इसे स्वीकार किए जाने की पुष्टि नहीं की गई है।
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अमेरिका ने क्या प्रस्ताव दिया है और यूक्रेन क्या चाहता है?
अमेरिका ने ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े संघर्षविराम का प्रस्ताव दिया है। इस मुद्दे पर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच पहले भी चर्चा हो चुकी है। यूक्रेन ऊर्जा क्षेत्र और काला सागर में कृषि आपूर्ति से जुड़े संघर्षविराम के विकल्पों पर विचार कर रहा है। इसके अलावा, यूक्रेनी सरकार युद्ध के मोर्चे पर बिना किसी शर्त के संघर्षविराम की संभावना भी परख रही है।

पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर क्या कहा?
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शांति पहल की सराहना की है। पुतिन ने कहा कि मोदी रूस के साथ अच्छे और मैत्रीपूर्ण संबंध होने के बावजूद लगातार यूक्रेन संघर्ष खत्म करने का मुद्दा उठाते रहे हैं। उन्होंने कहा, 'उनकी गहरी रुचि है और दोनों पक्षों को स्वीकार्य समाधान खोजने के लिए उनके पास बहुत अच्छे विचार हैं।' पुतिन ने यह भी कहा कि वह संघर्ष खत्म करने के लिए शांतिपूर्ण रास्ता अपनाने और इसे जल्द समाप्त करने की मोदी की इच्छा के लिए उनके आभारी हैं।
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प्रधानमंत्री मोदी ने शांति प्रयासों में भारत की भूमिका पर क्या कहा था?
प्रधानमंत्री मोदी ने अगस्त में जापानी समाचार पत्र योमिउरी शिंबुन को दिए साक्षात्कार में कहा था कि भारत ने रूस-यूक्रेन संघर्ष पर सैद्धांतिक और मानवीय रुख अपनाया है। उनके मुताबिक, रूस के राष्ट्रपति पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की, दोनों ने इस रुख की सराहना की है। मोदी ने कहा था कि दोनों नेताओं ने संघर्ष से जुड़े घटनाक्रम पर अपने विचार साझा करने के लिए उनसे बात की थी। उन्होंने दोनों देशों के साथ भारत के अच्छे संबंधों का हवाला देते हुए कहा था कि भारत यूक्रेन में जल्द और स्थायी शांति बहाल करने के प्रयासों को मजबूत कर सकता है।
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