मालदीव में महीनों से चल रहे भारत विरोधी प्रदर्शनों पर रोक लगा दी गई है। राष्ट्रपति मोहम्मद सोलिह ने "स्टॉपिंग कैंपेन दैट इनसाइट हेट्रेड अगेन्स्ट वेरियस कंट्रीज अंडर डिफरेंट स्लोगन्स" यानी अलग-अलग स्लोगन से दूसरे मुल्कों के खिलाफ नफरत पैदा करने वाले अभियानों पर रोक नाम से आदेश जारी किया है। राष्ट्रपति सोलिह ने कहा कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा हो रहा है। इस आदेश में 'इंडिया आउट' नाम से चल रहे भारत विरोधी प्रदर्शनों का भी जिक्र है।
इससे पहले 23 मार्च को मालदीव की संसद ने एक प्रस्ताव पास किया। इस प्रस्ताव से राजधानी माले में दो दिन बाद होने वाले विपक्ष के विरोध प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई। ये प्रदर्शन पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यमीन द्वारा बुलाया गया था। प्रस्ताव में कहा गया कि ये प्रदर्शन देश की सुरक्षा के लिए खतरा है। इसके जरिए मालदीव के उसके पड़ोसी देशों से रिश्ते खराब करने की कोशिश हो रही है। इसके बाद मालदीव की नेशनल डिफेंस फोर्स ने इस रैली और ऐसे प्रदर्शनों को रोक दिया। ये प्रदर्शन भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के दौरे से महज एक दिन पहले आयोजित किया गया था।
भारत विरोधी प्रदर्शनों की वजह क्या है? विरोध प्रदर्शन करने वालों की मांग क्या है? सरकार ने इन प्रदर्शनों को रोकने के लिए अब तक क्या-क्या किया? मालदीव के राजनीतिक समीकरण क्या कहते हैं? क्या इसमें चीन का भी कोई रोल है? आइये जानते हैं...
'इंडिया आउट' प्रदर्शन क्या है?
करीब दो साल पहले की बात है। एक विरोध प्रदर्शन चल रहा था। प्रदर्शनकारियों का आरोप था राष्ट्रपति सोहिल ने मालदीव को भारत के हाथों बेच दिया है। इसी दौरान 'इंडिया आउट' नाम का एक स्लोगन उछाला गया। इस रैली में आया यह स्लोगन सोशल मीडिया पर तेजी से फैला। पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यमीन जब जेल से बाहर आए तो उन्होंने इस स्लोगन को सत्तापक्ष के खिलाफ प्रदर्शन का हथियार बना लिया।
इंडिया आउट अभियान चला रहे लोगों का क्या दावा है?
विरोध प्रदर्शन करने वाले भारत को लेकर ही बड़ा आरोप लगा रहे हैं। उनका दावा है कि नई दिल्ली से बड़ी संख्या में सैनिक मालदीव में तैनात किए गए हैं। हालांकि, सोहिल सरकार लगातार इन आरोपों का खंडन करती रही है। सोहिल सरकार का कहना है कि सर्विलांस, रेस्क्यू और एयर एम्बुलेंस के संचालन और मेंटेनेस के लिए काम करने वाले फ्लाइट क्रू के अलावा देश में भारतीय सेना का कोई जवान नहीं है। विपक्ष का आरोप है कि मालदीवियन कोस्ट गार्ड के लिए बंदरगाह विकसित करने के नाम पर भारत ने यहा अपना मिलिट्री बेस बना लिया है। इस आरोप पर मालदीव की रक्षा मंत्रालय ने पिछले महीने कहा कि ये आरोप पूरी तरह गलत हैं।
इस पूरे अभियान के पीछे क्या राजनीति है?
पिछले दस साल से मालदीव में चीन अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिशें कर रहा है। उसने हिंद महासागर में अपना दखल बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है। इसी के तहत उसने श्रीलंका और मालदीव की राजनीति में दखल शुरू किया। विपक्षी नेता और पूर्व राष्ट्रपति नशीद को चीन का करीबी माना जाता है। नशीद के राष्ट्रपति रहते चीन का मालदीव में दखल काफी बढ़ा था। वहीं, भारत के साथ दशकों पुराने रिश्ते कमजोर पड़ने लगे। दरअसल, मालदीव और भारत के बीच बहुत मजबूत रिश्ता रहा है। दशकों से भारत हर क्षेत्र में मालदीव की मदद करता रहा है। पूर्व राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम के दौर में ये रिश्ते काफी मजबूत हुए। यहां तक कि भारत के नेशनल सिक्युरिटी गॉर्ड ने एक बार गयूम सरकार के तख्तापटल की कोशिश को भी नाकाम किया था।
दिसंबर 2021 में यमीन नजरबंदी से बाहर आए। मालदीव की सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा को पलट दिया। यमीन के बाहर आने के बाद भारत विरोधी रैलियां तेजी से बढ़ने लगीं। इनमें से कुछ में खुद यमीन भी मौजूद रहे। उन्होंने इस तरह की कुछ रैलियां भी कीं। 2024 में अगला राष्ट्रपति चुनाव होना है। यमीन इस अभियान के जरिए अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश में लगे हैं।
भारत ने मालदीव के लिए क्या किया है?
नई सरकार के गठन के बाद भारत और मालदीव के बीच रिश्तों में काफी सुधार हुआ है। पिछले साल जुलाई में भारत ने कम्युनिटी डेवेलपमेंट प्रोजेक्ट के लिए 55 लाख डॉलर दिए। भारत के कोच्चि से मालदीव के कुल्हुधुफुशी के बीच कार्गो फेरी की शुरुआत की गई। इतना ही नहीं मालदीव के कहने पर डॉर्नियर एयरक्राफ्ट भी भारत ने दिए। इन्हीं एयरक्राफ्ट की वजह से सरकार विपक्ष के निशाने पर है।
कोरोना के दौर में भी भारत ने मालदीव को 25 करोड़ डॉलर की राशी मदद के रूप में दी थी। यह मालदीव को किसी देश से मिलने वाली सबसे बड़ी मदद थी। इसके साथ ही कई अहम इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में भी भारत मालदीव की मदद कर रहा है।
क्या चीन विपक्ष की मदद कर रहा है?
विपक्षी नेता और पूर्व राष्ट्रपति नशीद को चीन का करीबी माना जाता है। सत्तापक्ष भी चीन पर विपक्ष का समर्थन करने का आरोप लगाता रहा है। सत्तापक्ष का कहना है कि चीन विपक्ष को पैसे देकर मालदीव के राजनीतिक माहौल में उथल-पुथल पैदा करने की कोशिशें कर रहा है। मालदीव के मीडिया में भी इस तरह की खबरें छपती रही हैं कि विपक्ष ने चीन के साथ अपने संबंध बनाए रखने की कोशिशें करता रहा है। इतना ही नहीं मालदीव के मीडिया का दावा है कि पूर्व राष्ट्रपति यमीन को जेल की सजा से बरी कराने के लिए भी विपक्ष ने चीन सरकार के साथ बीजिंग में बातचीत की थी।